टीम डायरी, 17/5/2021
ये पहला वीडियो मध्य प्रदेश के भोपाल शहर के ‘आम शख़्स’ योगेश बलवानी का है। और दूसरा शहर के बड़े ‘ख़ास अस्पताल’ चिरायु के प्रबन्धक गौरव बजाज का। ये अस्पताल इतना ख़ास है कि जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके जैसे दूसरे बड़े सत्ताधारी विशिष्ट जन कोरोना संक्रमित होते हैं, तो यहीं का रुख़ करते हैं। फिर ठीक होकर लौटते भी हैं।
सम्भवत: यही वज़ह है कि योगेश जैसे आम जन भी इस अस्पताल की तरफ़ दौड़ते हैं। जब वे या उनका परिजन कोरोना संक्रमित होता है, तब। आशा रहती है कि उन्हें अस्पताल से सुरक्षा की, संरक्षा की। लेकिन योगेश जैसे कई लोगों को इस अस्पताल का दूसरा चेहरा भी दिखता है, जब उनका परिजन किसी लिहाफ़ में बन्द हो, यहाँ से निकलकर मरघट पहुँच जाता है।
झटका तब और बड़ा लगता है उन्हें, जब अस्पताल के लोगों के दिल-दिमागों में ठहरा मरघट अपना लिहाफ़ हटाकर उनके सामने आ खड़ा होता है। ऐसे, मानो उसे किसी की फिक्र ही न हो। क्या व्यवस्था, क्या अवस्था। क्या इंसान, क्या इन्सानियत। किसी की भी नहीं। याद रहती है तो बस ठसक और हनक, अपने रुतबे की। अपनी पहुँच की। सिर्फ़ अपने हित की।
अब ऐसे में कोई कैसे कहे, ‘चिरायु हो’, ‘दीघायु हो’, ‘आयुष्मान भव’। भले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने की सोचते हों, तो सोचा करें। ‘आयुष्मान भारत’, ‘आयुष्मान कार्ड’ जैसी पहलें करते हों, तो किया करें। इन रुतबे वालों की बला से। ये तो अपनी मदमस्त चाल चलते यही कहेंगे, ‘आयुष् मा भव।’ यानि ‘दीर्घायु न हों’, ‘चिरायु न हों।’
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(नोट : ये वीडियो योगेश ने ख़ुद बनाए हैं, जो कोरोना मरीजों की परेशानी, अस्पतालों के रवैये और सरकारी प्रबन्धन की पोल खोलने के लिए काफ़ी हैं। योगेश ने ये वीडियो सोशल मीडिया पर इस मकसद से डाले हैं, कि अगर सम्भव हो आवाज़ प्रधानमंत्री जैसे बड़े लोगों तक पहुँचे। कोई ज़रूरी कार्रवाई हो। ताकि वे भले अपनी माँ को खो चुके हों, लेकिन किसी और के परिजन को, परिवार को इस स्थिति का सामना न करना पड़े। वक़्त विकट है, इसमें किसी की कुछ मदद हो सके तो हो जाए। बस, उनके इसी मकसद के कारण #अपनीडिजिटलडायरी भी उनके साथ है। अपने ‘सरोकार’ की वज़ह से। इसीलिए ये वीडियो यहाँ डायरी पर हैं।)
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