सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
अक्सर हम जानवरों, पक्षियों, आदि को बेज़ुबान कह देते हैं। यह मान लेते हैं कि उनमें बुद्धि नहीं होती। समझ नहीं होती। भावनाएँ और संवेदनाएँ नहीं होतीं। जबकि ये झूठी धारणाएँ हैं। सच्चाई यह है कि उनकी ज़ुबान होती है। उनकी अपनी भाषा होती है। उनमें बुद्धि और समझ होती है। उनमें भावनाएँ, संवेदनाएँ भी होती हैं।
यक़ीन न हो तो नीचे दिया गया वीडियो देख लीजिए।
वीडियो में दिख रहा तोते की प्रजाति का पक्षी अपनी मालकिन से बिछड़ गया था। शायद चोरी हो गया था। लेकिन फिर किन्हीं भले लोगों को मिल भी गया। उन्होंने जानकारी जुटाकर उस पक्षी को उसकी मालकिन से मिलवा दिया। और देखिए, दोबारा मिलने के बाद दोनों ही किस तरह अपनी ख़ुशी व्यक्त कर रहे हैं।
है न, दिलचस्प और प्रचलित धारणाएँ बदलने वाला?
अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More
कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More
शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More
भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More
जिन्दगी अपनी है, चुनाव भी अपने ही होते हैं। ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन… Read More