धुंध में घिरा जोतसोमा जल्दी ही जमीन के नीचे से बाहर निकल आए जीव-जंतुओं के लिए जानलेवा खेल का मैदान बन गया था। सूरज ढलने…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : मृतकों की आत्माएँ उनके आस-पास मँडराती रहती हैंCategory: चुनिन्दा पन्ने
वेद कहते हैं- मानव प्रकृति में अपना प्रतिबिम्ब, विश्व शान्ति खुद स्थापित होगी
“विश्व-शान्ति हेतु उपाय हमें वेद में दिखाई देते हैं। अगर वेदों के अनुसार हम विश्व-शान्ति के उपायों को अपनाएँ तो हम युद्धों से बच सकते…
View More वेद कहते हैं- मानव प्रकृति में अपना प्रतिबिम्ब, विश्व शान्ति खुद स्थापित होगी‘मेरो मन मेरा वृन्दावन’ : रास, रस और उपासना
वृन्दावन की रसोपासना में प्रेम के उत्तुंग शिखर और विरहसिन्धु के अतल तल से प्रवेश है। इसमें पात्रता का एक ही पैमाना है- प्रेमास्पद की…
View More ‘मेरो मन मेरा वृन्दावन’ : रास, रस और उपासनामेरो मन, मेरो वृन्दावन : सियाराममय सब जग जानीं…
वृन्दावन को यदि हम निखालिस भौतिकता की दृष्टि से देखें तो वह उतना ही पाँचभौतिक है, जितना कोई और वन, गाँव, कस्बा या नगर। वही…
View More मेरो मन, मेरो वृन्दावन : सियाराममय सब जग जानीं…‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह तब तक दौड़ती रही, जब तक उसका सिर…
अंबा के लिए बैकाल जेल से दूर निकल जाना बहुत जरूरी था। कोई और रास्ता नहीं था, सिवाय इसके कि वह सामने दिख रहे अँधेरे,…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह तब तक दौड़ती रही, जब तक उसका सिर…महायुद्ध पूर्व की लड़ाइयाँ जहाँ होती हैं, वहाँ क्यों इनका आभास भी नहीं होता?
विश्व एक संरचनात्मक बदलाव की स्थिति में प्रवेश कर चुका है। दरक रही निवर्तमान विश्व-व्यवस्था के लक्षणों पर कहीं कोई आवाज़ नहीं हो रही है।…
View More महायुद्ध पूर्व की लड़ाइयाँ जहाँ होती हैं, वहाँ क्यों इनका आभास भी नहीं होता?काम को संज़ीदगी से नहीं किया, तो समझो पत्ता साफ़?
कुछ लोगों की आदत होती है कि वे अपने ही काम के प्रति बहुत संज़ीदा नहीं होते। उसे चलताऊ तरीक़े से किया करते हैं। इसलिए…
View More काम को संज़ीदगी से नहीं किया, तो समझो पत्ता साफ़?ज़िन्दगी में ‘मूड’ नहीं, बल्कि हमारा ‘मूव’ मायने रखता है
हम अक्सर मूड को अपने ऊपर हावी पाते हैं। यानी जब मूड हुआ तो कोई काम करेंगे, और नहीं हुआ तो नहीं करेंगे। इससे हमेशा…
View More ज़िन्दगी में ‘मूड’ नहीं, बल्कि हमारा ‘मूव’ मायने रखता है,एक कविता….. ‘क़ातिल ऐशगाह!’
देर रात भूखे कुत्तों को पैकबंद फूड लिए घूमते हैं शफ़ीक़। वह बेक़सूर जानवरों के मुर्दा ज़िस्मों से बना होता है।।नेकी-पुण्य कमाने के लिए जो…
View More ,एक कविता….. ‘क़ातिल ऐशगाह!’संस्कृत की संस्कृति : पतंजलि ने क्यों कहा कि पाणिनि का शास्त्र महान् और सुविचारित है
हम आचार्य पाणिनि के व्याकरण की चर्चा कर रहे थे। वास्तव में आचार्य केवल व्याकरण का ग्रन्थ नहीं लिख रहे थे। अपितु वह भारतीय समाज…
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