आज के दौर में जहाँ हमारे पास सोशल मीडिया पर विज्ञापनों कि भरमार है, वहीं हमारी समझ इतनी छोटी हो गई है कि हम अच्छे…
View More असफलता झेलने के लिए ख़ुद को पहले से तैयार रखें, इसमें कोई बुराई नहींCategory: चुनिन्दा पन्ने
दूषित वाणी वक्ता का विनाश कर देती है….., समझिए कैसे!
वर्णों के उच्चारण की प्रक्रिया ‘शिक्षा’ नामक वेदांग से सीखने को मिलती है। वर्णों के स्पष्ट उच्चारण को संस्कृत व्याकरण परम्परा के ऋषि अत्यधिक महत्त्व…
View More दूषित वाणी वक्ता का विनाश कर देती है….., समझिए कैसे!‘मायावी अंबा और शैतान’ : फिर उसने गला फाड़कर विलाप शुरू कर दिया!
शाम को जब गोलीबारी थमी, तो लगा जैसे सब काल्पनिक सा घटा हो। झुलसे हुए और खून, धूल, मिट्टी के रंगों में रंगे हुए रास्ते…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : फिर उसने गला फाड़कर विलाप शुरू कर दिया!भारतीय परम्परागत अर्थशास्त्र और आधुनिक सोच वाले इकॉनमिक्स में क्या फ़र्क है?
उपनिवेशी भड़िहाई – 3 जिस तरह धर्म का शास्त्र, काम का शास्त्र और मोक्ष का शास्त्र होता है, वैसे ही हमारी भारतीय परम्परा में अर्थ…
View More भारतीय परम्परागत अर्थशास्त्र और आधुनिक सोच वाले इकॉनमिक्स में क्या फ़र्क है?‘शिक्षा’ वेदांग की नाक होती है, और नाक न हो तो?
भाषा के तौर पर संस्कृत की तकनीक और उसका सौन्दर्य अतुलनीय है। हम क्रमश: इसके तकनीक पक्ष पर दृष्टि डालेंगे। तो, सामान्य जन को भाषा…
View More ‘शिक्षा’ वेदांग की नाक होती है, और नाक न हो तो?‘मायावी अंबा और शैतान’ : ऐसे बागी संगठन का नेतृत्त्व करना महिलाओं के लिए सही नहीं है
“मैं तो बस ये कह रहा था कि ऐसे बागी संगठन का नेतृत्त्व करना महिलाओं के लिए सही नहीं है… या यूँ समझ लो कि…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : ऐसे बागी संगठन का नेतृत्त्व करना महिलाओं के लिए सही नहीं है‘श्रीकृष्ण के कर्मयोग के साधक’ डॉ. रवि कन्नन, जन्माष्टमी पर इन कैंसर विशेषज्ञ को जानिए!
आज जन्माष्टमी है। रस्मअदायगी के तौर पर मीडिया-सोशल मीडिया में श्रीकृष्ण के जीवन से मूल मंत्र लेकर सबको बाँटे जा रहे हैं। आम बोल-चाल की…
View More ‘श्रीकृष्ण के कर्मयोग के साधक’ डॉ. रवि कन्नन, जन्माष्टमी पर इन कैंसर विशेषज्ञ को जानिए!‘मायावी अंबा और शैतान’ : सरकार ने उनकी प्राकृतिक संपदा पर दिन-दहाड़े डकैती डाली थी
तनु बाकर के व्यवहार में उसकी जमीन के उजड़ने का दर्द झलकता था। वह तकलीफ झलकती थी, जो अनिवार्य रूप से ऐसे देश की थी,…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : सरकार ने उनकी प्राकृतिक संपदा पर दिन-दहाड़े डकैती डाली थीआज की ‘अहिंसा’ क्या है? और ‘जीवो जीवस्य जीवनम्’ का क्या अर्थ है?
उपनिवेशी भड़िहाई – 2 पिछले लेख में हमने देखा उपनिवेशी भड़िहाई (चोरी) का प्रधान हथियार छद्म होता है। उपनिवेशी तानाशाही का लक्ष्य भारत में अपनी…
View More आज की ‘अहिंसा’ क्या है? और ‘जीवो जीवस्य जीवनम्’ का क्या अर्थ है?‘मायावी अंबा और शैतान’ : अहंकार से ढँकी आँखों को अक्सर सच्चाई नहीं दिखती
“यह ठीक नहीं है, मास्टर!” सुशीतल की ऊँची होती आवाज में चिड़चिड़ापन था, “ये नहीं हो सकता।” “वे दोनों अलग-अलग चीजें हैं भाँजे।” “अंबा को…
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