अभी 22 अप्रैल को ‘पृथ्वी दिवस’ था। यह पहला अवसर है, जब पूरी दुनिया के ‘मानव’ एक ही समय में एक जैसी महामारी से पीड़ित है।…
View More यह वैश्विक महामारी कोरोना हमें किस ‘दर्शन’ से साक्षात् करा रही है?Category: चुनिन्दा पन्ने
स्मृतियों के धागे से वक़्त को पकड़ता हूँ, ताकि पिंजर से आत्मा के निकलने का नाद गूँजे
यह भी शुरुआत ही है। लगता है कि सब कुछ ख़त्म हो गया है। जीवन कुल चार मकानों के इर्द-गिर्द समेट कर रख लिया है…
View More स्मृतियों के धागे से वक़्त को पकड़ता हूँ, ताकि पिंजर से आत्मा के निकलने का नाद गूँजे‘द बिग बुल’ के बहाने, हेमन्त शाहों को पहचानें, जो हमारे सपनों का मोल-भाव कर रहे हैं
‘द बिग बुल’ अभिषेक बच्चन की फिल्म है। उन्होंने इसमें अपनी अभिनय क्षमता को खरा सोना साबित करने के लिए जी-तोड़ मेहनत की है। हालाँकि फिल्म…
View More ‘द बिग बुल’ के बहाने, हेमन्त शाहों को पहचानें, जो हमारे सपनों का मोल-भाव कर रहे हैंडायरी की सबसे पठनीय श्रृंखलाओं में से एक, एकांत की अकुलाहट का दिन बदला
जाने-माने लेखक संदीप नाईक जी की ‘एकांत की अकुलाहट’ श्रृंखला का हम दिन बदल रहे हैं। इस श्रृंखला की अगली कड़ियॉ॑ अब हर शनिवार को…
View More डायरी की सबसे पठनीय श्रृंखलाओं में से एक, एकांत की अकुलाहट का दिन बदलामाँ की ममता, घर की विवशता और डॉक्टर का फ़र्ज़
जीवन में कई बार छोटी-छोटी कहानियाँ बड़ी सीख दे जाती हैं। लेकिन वे कहानियाँ सबसे सुन्दर होती हैं, जो इंसानियत का पाठ पढ़ाती हैं। इस छोटी-सी कहानी…
View More माँ की ममता, घर की विवशता और डॉक्टर का फ़र्ज़भेदभावविनाशकं खलु दिव्यभाषा संस्कृतम्
धर्म, जाति, भाषा के नाम पर एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े होने की सूचना-सामग्री अथाह है। समाचार माध्यमों और कथित सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर ऐसा…
View More भेदभावविनाशकं खलु दिव्यभाषा संस्कृतम्रसूख, दिल बड़ा होने से बढ़ता है या दिमाग चढ़ा होने से?
निश्चित रूप से यह एक बड़ा सवाल है कि हमारा रसूख यानि ‘स्टेटस’ सही मायने में आखिर बड़ा कैसे होता है? हमारा दिल बड़ा होने…
View More रसूख, दिल बड़ा होने से बढ़ता है या दिमाग चढ़ा होने से?शान्ति और स्थिरता व्यक्तित्व में गहराई से आती है..
अक्सर कहा जाता है, ‘गहरी नदी का बहाव हमेशा शान्त होता है।’ एकदम सही है। लेकिन क्या इसी ‘कहन’ का दूसरा पहलू ये नहीं है…
View More शान्ति और स्थिरता व्यक्तित्व में गहराई से आती है..कुमार गन्धर्व : जिनके गाए ‘निर्गुण’ से गुण-अवगुण परिभाषित कर पाता हूँ!
भारतीय मनीषा, विलक्षण संगीतकार और महान गायक पंडित कुमार गंधर्व का आज जन्मदिन है। कर्नाटक से मालवा के देवास में आ बसे। फिर यहीं जीवनभर…
View More कुमार गन्धर्व : जिनके गाए ‘निर्गुण’ से गुण-अवगुण परिभाषित कर पाता हूँ!‘मत कर तू अभिमान’ सिर्फ गाने से या कहने से नहीं चलेगा!
पूरा जीवन राय बनाने में, विचारों को संश्लित करने में, सघन अनुभूतियों की जमीन को उर्वरा बनाने में ही निकलता नज़र आ रहा है। यह…
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