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अब ‘एक देश, एक समय’ की तैयारी, तो क्या अभी अलग-अलग जगहों के समय में फर्क है?

सूचना है कि भारत सरकार अब देशभर में एक समान मानक समय (आईएसटी यानि भारतीय मानक समय) लागू करने की तैयारी कर रही है। यह…

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one nation one calender, panchang

‘एक देश, एक त्योहार-तिथि’, यह सुनिश्चित करने की पहल ख़ुद शंकराचार्य क्यों नहीं करते?

‘एक देश-एक पंचांग’ या दूसरे शब्दों में ‘एक देश-एक त्योहार तिथि’, कुछ भी कह लीजिए। इस सन्दर्भ में निश्चित स्थिति तय किए जाने की आवश्यकता…

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Mayavi Amba-78

‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वहाँ रोजी मैडबुल का अब कहीं नामो-निशान नहीं था!

वह मानो किसी सपने से उठी हो। रात के सपने से, भयावह रात के सपने से बाहर आकर सीधे तनकर खड़ी हो गई हो। उसकी…

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Sanskriti, Sanskritik

सांस्कृतिक पुनर्जागरण कैसे होगा? और उसका मार्गदर्शन कौन करेगा?

हमारे सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सनातन श्रौत यज्ञ परम्परा के महत्व का अन्तिम भाग दो सप्ताह पहले पूरा किया। एक बोझिल, अरुचिकर और पुरातनपन्थी विषय पर…

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Mayavi Amba-77

‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह पटाला थी, पटाला का भूत सामने मुस्कुरा रहा था!

दुनिया एकाएक आदिमयुगीन अराजकता में पहुँच गई। बेलगाम नफरत और क्रोध की जहरीली हवा अंबा के फेंफड़ों में भर गई थी। वह अपने आप में…

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sn subhrahmanyan, L&T

“घर में पत्नी का चेहरा पति कितनी देर देखेगा”, ऐसा भाव रखने वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित कैसे?

भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान है। वैदिक ऋषि ने व्यक्ति के लक्ष्यों की अवधारणा प्रस्तुत की, तब उसने धर्म के बाद अर्थ की अवधारणा को दूसरे…

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Mayavi Amba-76

‘मायावी अम्बा और शैतान’ : डायन को जला दो! उसकी आँखें निकाल लो!

“गए, गायब हो गए! सब गायब हो गए!” एक आदमी खाली जगह की ओर इशारा करते हुए बेवकूफों की तरह बड़बड़ाने लगा। एक क्षण पहले…

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sanatan dharm raksha

अधर्मसापेक्षता आत्मघाती है, रक्षा वैदिक यज्ञ संस्कृति से होगी

शृंखला के पूर्व भागों में हमने सनातन के नाम पर प्रचलित भ्रांतियों को देखा। इन भ्रांतियों के प्रचलित और प्रभावशाली होने के कारण यानी वैदिक…

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Mayavi Amba-75

‘मायावी अम्बा और शैतान’ : डायन का अभिशाप है ये, हे भगवान हमें बचाओ!

बर्फीली ओस ने उसके चेहरे को जो ठंडक दी, वह किसी नए आतंक की आमद का ऐलान भी था। इसलिए कि इससे पहले किसी को…

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Jan Gan Man

हमारे राष्ट्रगान में जिस ‘अधिनायक’ का ज़िक्र है, क्या वह ‘भारत की नियति’ ही है?

भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन…’ से जुड़ी अहम तारीख़ है, 27 दिसम्बर। सन् 1911 में इसी तारीख़ को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (कोलकाता…

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