ज़िन्दगी में दो ही लोग चाहते हैं कि हम उनसे ज्यादा कामयाब हों। पहले- हमारे माता-पिता और दूसरे हमारे शिक्षक। हम कितने भी अमीर या…
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शिवाजी ‘महाराज’ : अग्नि को मुट्ठी में भींचा जा सकता है, तो ही शिवाजी को जीता जा सकता है
राजसभा में सिहासनारोहण आदि विधि और बाकी समारोह लगभग चार घंटे चला। इसके बाद महाराज शोभायात्रा के लिए तैयार हो गए। राजसभा के बाहर हाथी…
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चारों तरफ से खुशियाँ उमड़ रही थीं। आनन्द के मीठे बोल फूट रहे थे। महाराज प्रसन्न मुद्रा से सिंहासन पर बैठे थे। तभी सोलह सुहागनें…
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महाराज के माथे पर से अभिषेक-जल की अमृतमय धाराएँ बह निकलीं। जिजाऊ साहब का बरसों से सजाया हुआ सपना उनके जीते-जी पूरा हुआ। उनके बेटे,…
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राजसभा के चबूतरे पर महाराज का सिंहासन था। नक्कारखाने से राजसभा में प्रवेश करते ही सामने शानदार ऊँचे चबूतरे पर यह चौकी दिखाई देती है।…
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रायगढ़ पर वेदमूर्ति गागाभट्ट तथा राजोपाध्याय अर्वीकर के मार्गदर्शन में राज्याभिषेक की पूर्व तैयारी शुरू हुई। गागाभट्ट तो बहुत ही कर्मठ थे। राज्याभिषेक के लिए…
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महाराज का सबसे चहेता और महत्त्वपूर्ण किला पन्हालगढ़ अभी स्वराज में वापिस नहीं आया था। महाराज को पन्हाला वापस लेने की तीव्र इच्छा थी। एक…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : राज्याभिषिक्त हों, सिंहानस्थ हों शिवबा‘मैंनूँ की’ सिद्धान्त पर चलने वालों को कर्नाटक की इन बुजुर्ग माँ से प्रेरणा लेनी चाहिए
कर्नाटक में मेंगलुरू के पास एक जगह है मंडारा। वहाँ रहती हैं 70 साल की बुजुर्ग चन्द्रावती जी। इन्हें इस बुधवार, पाँच अप्रैल को भारतीय…
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दिंडोरी की जीत के आठ ही दिन बाद मोरोपन्त पिंगले ने त्र्यम्बकगढ़ जीत लिया (दिनांक 25 अक्टूबर 1670)। अगले ही महीने (नवम्बर) में महाराज विदर्भ…
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माघ कृष्ण पक्ष नवमी। काली डरावनी आधी रात (दिनांक 4 फरवरी 1670)। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। झुरमुटों में झींगुर बोल रहे थे। सिंहगढ़…
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