मूल वाल्मीकीय रामायण में “रामायण” के शब्दार्थ “राम की यात्रा” के अनुरूप बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड की प्रक्षिप्तता की स्थापना करनेवाले विद्वानों में वासुदेव शरण अग्रवाल…
View More वाल्मीकि-रामायण में पहले पाँच ही काण्ड थे, अयोध्याकाण्ड से युद्धकाण्ड तक!Category: चुनिन्दा पन्ने
यह वाल्मीकि रामायण का बालकाण्ड है या विश्वामित्र-काण्ड?
वाल्मीकीय रामायण में बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड के प्रक्षिप्त होने के मुद्दे पर विशेषज्ञ विद्वानों की शरण में जाने से पहले थोड़ा समय देकर इन काण्डों…
View More यह वाल्मीकि रामायण का बालकाण्ड है या विश्वामित्र-काण्ड?आख़िर क्यों महर्षि वाल्मीकि को भगवान राम का समकालीन मानने के लिए ठोस आधार नहीं है?
पूर्व में बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड के जिन प्रसंगों का उल्लेख किया गया, वही वाल्मीकि और राम को समकालीन बनाते हैं। ये प्रसंग ख़ुद वाल्मीकि द्वारा…
View More आख़िर क्यों महर्षि वाल्मीकि को भगवान राम का समकालीन मानने के लिए ठोस आधार नहीं है?‘थ्री इडियट’ के फुंगशुक वाँगड़ू यानी सोनम वाँगचुक भूख-हड़ताल कर रहे हैं, ताकि ‘विकास-लीला’ से लद्दाख बच जाए
‘थ्री इडियट’ फिल्म के फुंगशुक वाँगड़ू तो सबको याद होंगे ही। अस्ल ज़िन्दगी में इस फिल्मी किरदार का नाम है, सोनम वाँगचुक। लद्दाख में रहते…
View More ‘थ्री इडियट’ के फुंगशुक वाँगड़ू यानी सोनम वाँगचुक भूख-हड़ताल कर रहे हैं, ताकि ‘विकास-लीला’ से लद्दाख बच जाएजानकारों ने बताया- प्रबन्धन के क्षेत्र में योग कितना प्रासंगिक है
मानव जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान योग से सम्भव है। आज के शोध कहते हैं कि योग हमें और हमारे जीवन को ही केवल…
View More जानकारों ने बताया- प्रबन्धन के क्षेत्र में योग कितना प्रासंगिक हैक्या भगवान राम के समकालीन थे महर्षि वाल्मीकि?
इस विषय की पिछली पोस्ट (भाग-चार) में वाल्मीकीय रामायण के युद्धकाण्ड के अन्तिम सर्ग (128) में फलश्रुति (ग्रन्थ के माहात्म्य) का ज़िक्र आया था। इस…
View More क्या भगवान राम के समकालीन थे महर्षि वाल्मीकि?क्या वाल्मीकीय रामायण में बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड बाद में कभी जोड़े गए?
वाल्मीकीय रामायण के मूल स्वरूप के निर्धारण में प्रक्षिप्त की पहचान के लिए सामान्यत: संस्कृत के ऐसे प्रकाण्ड विद्वान की ज़रूरत होनी चाहिए जो भाषाविज्ञान…
View More क्या वाल्मीकीय रामायण में बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड बाद में कभी जोड़े गए?‘प्रबंधन के क्षेत्र में योग की प्रासंगिकता’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
भारत प्रज्ञाप्रतिष्ठान #अपनीडिजिटलडायरी के सहयोग से ‘प्रबंधन के क्षेत्र में योग की प्रासंगिकता’ विषय पर दिनांक 29/01/2023 , रविवार, सायं 6:00 से 7:45 के बीच…
View More ‘प्रबंधन के क्षेत्र में योग की प्रासंगिकता’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठीमृच्छकटिकम्-अंतिम भाग : दासता ऐसी बुरी होती है कि सत्य कहने पर भी कोई भरोसा नहीं करता
चारुदत्त चांडालों द्वारा वध हेतु ले जाया जाता है। वह अपनी मृत्यु की सम्भावना से दुखी नहीं है। अपितु कलंकित होकर मृत्यु का ग्रास बन…
View More मृच्छकटिकम्-अंतिम भाग : दासता ऐसी बुरी होती है कि सत्य कहने पर भी कोई भरोसा नहीं करताअग्नि परीक्षा प्रसंग : किस तरह तुलसी ने सीता जी को ‘वाल्मीकीय सीता’ की त्रासदी मुक्त किया!
भिन्न-भिन्न काल में, भिन्न-भिन्न वैचारिक समूहों का प्रतिनिधित्त्व करनेवाली कई रामायणें लिखी गईं। किन्तु देश की मुख्य धारा में वाल्मीकीय रामायण को इतनी प्रतिष्ठा मिली…
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