चारुदत्त के साथ स्नेहिल मिलन से वसंतसेना अत्यधिक प्रसन्न है। दोनों रात्रि में साथ विश्राम करते हैं। सुबह जब वसंतसेना जगती है, तब तक चारुदत्त…
View More मृच्छकटिकम्-15 : जो शरणागत का परित्याग करता है, उसका विजयलक्ष्मी परित्याग कर देती हैCategory: चुनिन्दा पन्ने
प्रकृति मतान्धता का भार ही भारी मन से उठा रही है
आजकल यदि किसी प्रकार कोई परंपरा में निष्ठावान् व्यक्ति हम जैसे ज्ञानलवदुर्विदग्ध के सम्मुखी हो जाए तो क्या मज़ाल कि हम उस व्यक्ति को सुनेंगे।…
View More प्रकृति मतान्धता का भार ही भारी मन से उठा रही हैमृच्छकटिकम्-14 : इस संसार में धनरहित मनुष्य का जीवन व्यर्थ है
वसंतसेना अपने सेवक के साथ चारुदत्त के घर जाने के लिए निकलती है। बादल आकाशीय बिजली की चमक और तेज बारिश के साथ बरस रहे…
View More मृच्छकटिकम्-14 : इस संसार में धनरहित मनुष्य का जीवन व्यर्थ हैमृच्छकटिकम्-13 : काम सदा प्रतिकूल होता है!
वसंतसेना अपनी सेविका के साथ चारुदत्त से मिलने निकल जाती है। चारुदत्त अपने भवन में बैठे दुःखी मन से अपने दुर्दिनों को याद कर रहा…
View More मृच्छकटिकम्-13 : काम सदा प्रतिकूल होता है!सुनो! ये दिवाली नहीं, दीवाली है
“सुनो! ये जो तुम दिवाली-दिवाली बोलती रहती हो न, ये दिवाली नहीं है। दीवाली है। दिवाली बोलती हो और दिवाली ही लिख देती हो। ग़लत…
View More सुनो! ये दिवाली नहीं, दीवाली हैमृच्छकटिकम्-10 : मनुष्य अपने दोषों के कारण ही शंकित है
‘वसंतसेना’ की माता वसंतसेना को बुलाने का सन्देश भिजवाती हैं। वसंतसेना इधर ‘चारुदत्त’ द्वारा बनाई पेंटिंग की सराहना करती हुई ‘मदनिका’ से पूछती पूछती है…
View More मृच्छकटिकम्-10 : मनुष्य अपने दोषों के कारण ही शंकित हैऋषि सुनक जब ख़ुद को भारतवंशी कहते हैं, तो उन्हें पाकिस्तानी बताने की होड़ क्यों?
ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के परिवार की जड़ें कहाँ हैं? ख़ुद ऋषि सुनक की मानें तो वे ‘भारतवंशी’ हैं। उन्हें उनके ‘भारतवंशी’ होने…
View More ऋषि सुनक जब ख़ुद को भारतवंशी कहते हैं, तो उन्हें पाकिस्तानी बताने की होड़ क्यों?मृच्छकटिकम्-5 : जुआरी पाशों की तरफ खिंचा चला ही आता है
‘वसंतसेना’ दरिद्र ‘चारुदत्त’ से प्रेम करती है, ऐसा जानकर ‘मदनिका’ कहती है : क्या मंजरीरहित आमों पर मधुकारियां (भौरें) कभी बैठी हैं? वसंतसेना : तभी…
View More मृच्छकटिकम्-5 : जुआरी पाशों की तरफ खिंचा चला ही आता हैमृच्छकटिकम्-3 : स्त्री के हृदय में प्रेम नहीं तो उसे नहीं पाया जा सकता
पूजा पूरी करने के बाद ‘चारुदत्त’ फिर से मातृदेवियो को बलि देने जाने के लिए ‘मैत्रेय’ को आदेश देता है। लेकिन ‘मैत्रेय’ के मना कर…
View More मृच्छकटिकम्-3 : स्त्री के हृदय में प्रेम नहीं तो उसे नहीं पाया जा सकताबाहर कोई और आया, यह बताने कि बच्चे के अब्बा अस्पताल में हैं…
अदालत का फैसला हो चुका है। सरकारों की चाल-ढाल भी देख ली गई है। कमियों, खामियों, अनदेखियों और मनमानियों का यह पिटारा अनंत है। हो…
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