विषाणु (Virus) हमारे जीवन में सिर्फ़ विष यानि नकारात्मकता नहीं लाते। वे हमें काफी कुछ सकारात्मक भी देते हैं। बल्कि कुछ विषाणु तो अच्छे ही माने…
View More आज का दिन वायरस यानि विषाणुओं की तारीफ़ का, जानते हैं क्यों?Category: चुनिन्दा पन्ने
यूरोपीय भाषा दिवस, जिसमें हिन्दी से जुड़े विवादों का समाधान भी छिपा है!
अभी इसी महीने की 14 तारीख को ‘हिन्दी दिवस’ मनाया गया। हर साल मनाया जाता है। लेकिन हर बार हिन्दी के प्रसार के लिए होने वाले…
View More यूरोपीय भाषा दिवस, जिसमें हिन्दी से जुड़े विवादों का समाधान भी छिपा है!मेरे 18,424 रुपए कहाँ गए? जमीन खा गई या आसमान निगल गया?
मैंने 17 अगस्त 2020 को फ्लिपकार्ट से एक मोबाइल फ़ोन मँगवाया। सामान बताए गए पते पर पहुँचने के बाद भुगतान करने (कैश ऑन डिलीवरी) का वहाँ कोई विकल्प नहीं था। इसलिए…
View More मेरे 18,424 रुपए कहाँ गए? जमीन खा गई या आसमान निगल गया?छज्जे पर धूप सेंकती एक टोपी की कहानी!
नैनीताल में जुलाई से सितम्बर तक लगभग ढाई-तीन महीनों की लगातार बरसात और सीलन के बाद धूप आने पर गर्म कपड़ों, गलीचों, गद्दे और रजाइयों…
View More छज्जे पर धूप सेंकती एक टोपी की कहानी!प्रिय ईशू! ज्ञान का आधार तो मनुष्य स्वयं ही होता है, लेकिन…
प्रिय ईशू तुम कुछ ही दिनों बाद इस समय जिनेवा में सम्भवत: अपनी कक्षा में रहोगे। यह भगवद्कृपा है कि उच्च शिक्षा के लिए तुम्हें एक…
View More प्रिय ईशू! ज्ञान का आधार तो मनुष्य स्वयं ही होता है, लेकिन…संयोग और चमत्कार में आख़िर अन्तर क्या है?
आज अनन्त चतुर्दशी मनाई गई। भगवान विष्णु के अनन्त स्वरूप की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। इसलिए उन्हीं से जुड़े अपने अनुभव के…
View More संयोग और चमत्कार में आख़िर अन्तर क्या है?राधाष्टमी : ‘या कन्या के आगैं कोटिक बेटन को अब मानैं’
हिन्दु पंचांग के अनुसार आज राधाष्टमी है। यानि वह दिन, जब मधुरा के बरसाना कस्बे में, मुखिया वृषभान राय के घर ‘राधा जी’ ने जन्म…
View More राधाष्टमी : ‘या कन्या के आगैं कोटिक बेटन को अब मानैं’लिज़ा स्थालकर : खेल दिवस पर भारत का मान बढ़ाने वाली इस बेटी का ज़िक्र
आज राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द का जन्मदिन। भारत का मान बढ़ाने वाले खेल-खिलाड़ियों को उनके हिस्से का सम्मान देने का…
View More लिज़ा स्थालकर : खेल दिवस पर भारत का मान बढ़ाने वाली इस बेटी का ज़िक्रवह हमारी स्मृतियों में राेज ही जीवन्त हो जाया करती थी, जैसे आज फिर हो आई है!
आज यकायक माई की याद आ गई। इसीलिए उसकी स्मृति को डायरी में दर्ज कर रही हूँ। यही कोई 38 साल पहले की बात है। तब…
View More वह हमारी स्मृतियों में राेज ही जीवन्त हो जाया करती थी, जैसे आज फिर हो आई है!पंडित जसराज यहीं हैं, और अब तो हर कहीं हैं!
ख़बर आई है कि पंडित जसराज नहीं रहे। पर क्या ऐसा हो सकता है भला? ये सवाल ग़ैरवाज़िब नहीं, बल्कि सोचने लायक है। क्योंकि जो…
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