फिर स्कूल खुलवाने की कोशिशों के बीच क्या ये ख़बर बच्चों के लिहाज़ से चिन्ता बढ़ाने वाली नहीं है?

कुछ दिनों पहले एक ख़बर पढ़ी थी। विशेष तौर पर मध्य प्रदेश के सन्दर्भ में थी। हालाँकि कमोबेश वैसी स्थिति दूसरे राज्यों में भी हो सकती…

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संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलताओं की नई कहानियों के बीच एक पुरानी कहानी ‘साढ़े तीन फीट’ की भी!

अभी चार अगस्त (मंगलवार) को ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)-2019 की परीक्षा का अन्तिम नतीज़ा आया है। इसमें हरियाणा के प्रदीप सिंह ने पहला स्थान…

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मई माह, कभी बारात की सामूहिक मेहमाननवाज़ी का महीना भी होता था, याद है?

वैश्विक महामारी ‘कोरोना’ के इस दौर में देशव्यापी तालाबन्दी है। इसलिए शादी-ब्याह भी नहीं हो रहे हैं। वरना अप्रैल, मई, जून के महीनों में तो…

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बेटा! मेरे नाम की चिट्ठी भेज दे, अब भगवान मुझे बुला ले

ये एक माँ के बोल हैं। सुनकर मन खिन्न रहा दिनभर। समझ नहीं आया कि क्या करूँ, किससे कहूँ। कैसे मदद करूँ। उस माँ की,…

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लगता है, जैसे हम समाज में हैं पर ‘समाज’ कहीं नहीं है!

किस्सा 1967-68 का है। जाने-माने व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय के संस्मरण के रूप में यह किस्सा ‘दैनिक भास्कर’ अख़बार के फीचर पेज ‘साहित्य रंग’ में प्रकाशित…

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माँ कहती हैं- ये खदेड़े गए हैं, नहीं तो जान पर जोख़िम लेकर कोई यूँ नहीं निकलता!

उस रोज़ कामगारों के रेले-दर-रेले से गुज़रते हुए सिर्फ़ मैं ही बेचैन नहीं था। मेरे साथ गाड़ी की पिछली सीट में सवार माँ भी यह…

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