कुछ इंसान अंतरात्मा के बिना ही जन्म लेते हैं। ऐसे लोगों को बस खत्म कर देने की जरूरत होती है। नाथन रे को पूरा भरोसा…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : बेवकूफ इंसान ही दौलत देखकर अपने होश गँवा देते हैंCategory: चहेते पन्ने
“मैडम, हम तो इसे गिराकर यह समझा रहे थे कि देखो स्ट्रेट एंगल ऐसे बनता है”
मेरी कक्षा की सबसे पिछली सीट पर बैठने वाले दो बच्चे- निखिल और आदर्श l पिछली बेंच पर इसलिए क्योंकि दोनों अन्य बच्चों से लम्बे…
View More “मैडम, हम तो इसे गिराकर यह समझा रहे थे कि देखो स्ट्रेट एंगल ऐसे बनता है”‘मायावी अंबा और शैतान’ : पुजारी ने उस लड़के में ‘उसे’ सूँघ लिया था और हमें भी!
# 20 साल और एक दिन # हम कभी कमजोर पात्रों में नहीं रहते। कमजोर शरीरों को ठिकाना नहीं बनाते क्योंकि उनके मानस-पटल बहुत कोमल…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : पुजारी ने उस लड़के में ‘उसे’ सूँघ लिया था और हमें भी!शुरू में अपनी गाड़ी को धक्का ख़ुद ही लगाना होता है….. देखिए, जगजीत सिंह भी लगा रहे हैं!
मीडिया और मनोरंजन उद्योग में नामी व इज़्ज़तदार शख़्सियत हैं जनाब सैयद मोहम्मद इरफ़ान। रेडियो और टेलीविज़न से इनका पुराना नाता है। फिल्मी दुनिया पर…
View More शुरू में अपनी गाड़ी को धक्का ख़ुद ही लगाना होता है….. देखिए, जगजीत सिंह भी लगा रहे हैं!सँभलो हुक़्मरान ; यमुना ने नहीं, दिल्ली दरबार की चौखट पर ‘यमराज’ ने आमद दी है!
इस बार दिल्ली में यमुना ने त्राहिमाम् मचा दिया। सुर्ख़ियों में बताया गया कि क़रीब 45 साल बाद दिल्ली ऐसी बाढ़ में डूबी है। यमुना…
View More सँभलो हुक़्मरान ; यमुना ने नहीं, दिल्ली दरबार की चौखट पर ‘यमराज’ ने आमद दी है!प्रकृति की विनाश-लीला अस्ल में हमारी विकास-लीला का ज़वाब है, चेत जाइए!
आज, 11 जुलाई को पूरी दुनिया में ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया गया। भारत में इस बार यह अवसर दो अर्थों में ख़ास रहा। पहला- इसलिए…
View More प्रकृति की विनाश-लीला अस्ल में हमारी विकास-लीला का ज़वाब है, चेत जाइए!‘दिल्ली रोबोटिक्स लीग’ : स्कूली बच्चों के लिए एक सरकारी आयोजन… कभी, कहीं सुना है?
शिक्षा या ज्ञान मानव जीवन में हासिल की जाने वाली सबसे उत्कृष्ट और सबसे अद्भुत चीज है। अगर मानव को शिक्षित होने का अवसर मिल…
View More ‘दिल्ली रोबोटिक्स लीग’ : स्कूली बच्चों के लिए एक सरकारी आयोजन… कभी, कहीं सुना है?‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गए
# उसे # “मर जाने दो उसे”, ये पहले शब्द थे, जो जन्म के समय उसके लिए निकाले गए। हमें पता है क्योंकि हम वहीं…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गए‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती है
छूटने से ऐन पहले लोकल को किसी तरह दौड़ते-भागते पकड़ लेना, टूटती साँस की डोर को थाम लेने जैसा आभास कराता है। ये लक्ष्य तय…
View More ‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती हैगुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती है
उस रोज़ संगीत दिवस था। तारीख इसी 21 जून की। एक घटना ऐसी हुई कि मुझे महाभारत का एकलव्य-द्रोण-अर्जुन प्रसंग फिर याद आ गया। ऐसी…
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