भरत अपने ननिहाल से वापस अयोध्या पहुँचते हैं। अयोध्या में स्थितियाँ बहुत विकट थीं। एक तरफ राज सिंहासन प्रतीक्षा कर रहा था। दूसरी तरफ पिता की…
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पंडित रविशंकर, एक प्रेरक शख़्सियत, जिसने ‘ज़िन्दगी’ को थामा तो उसके मायने बदल दिए
पंडित रविशंकर आज 101 साल के हो गए। ऐसा इसलिए कहना ठीक है, क्योंकि उनके जैसे लोगों की सिर्फ़ देह ही दुनिया छोड़ती है। शख़्सियत…
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आज फेसबुक स्क्रॉल करते हुए ‘डायरी’ की एक पोस्ट सामने आ गई। पोस्ट में एक सुन्दर तस्वीर पर माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता लिखी थी।…
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किताबें ज्ञान का स्रोत हैं या फिर ज्ञान किताबों के सृजन का माध्यम? इस प्रश्न पर विचार का भरा-पूरा कारण दिया है इस कविता ने। प्रश्न के…
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मराठी संस्कृति वृहद और समृद्ध है। इसके कई अच्छे गुणों में संस्कार से लेकर खान-पान, पहनावा और घर परिवारों का रखरखाव भी महत्वपूर्ण है। इसके…
View More रंगपंचमी, सूखे रंग और कैनवास पर रंगोली!चार्वाक हमें भूत-भविष्य के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, पर क्या हम हो पाए हैं?
आचार्य चार्वाक बड़ी सुन्दर बात कहते हैं। उनकी बातें आज वर्तमान युग के एकदम अनुकूल हैं। बल्कि एक विचार तो यह भी हो सकता है कि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में प्रचलित…
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उजालों में अँधेरे देखने का आदी था वो। जब दुनिया जागती, उसे लगता कि अब सूरज ढला है। रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर…
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चाय। चाय केवल इसीलिए नहीं पी जाती कि अच्छी लगती है। चाय पीने के और भी कई कारण हो सकते हैं। चाय आदर-सत्कार की अनिवार्य…
View More मैं अगर चाय छोड़ सकता हूँ, तो यक़ीन करना चाहिए- कोई कुछ भी कर सकता हैअहो! भारत के तेज से युक्त यह होली दिख रही है..
जिस उम्र में लोग आधुनिकता और दुनियावी चमक-दमक के पीछे भागते हैं, उस उम्र में कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो संस्कृत और संस्कृति को…
View More अहो! भारत के तेज से युक्त यह होली दिख रही है..काश, चाँद की आभा भी नीली होती, सितारे भी और अंधेरा भी नीला हो जाता!
इसी गाढ़ी नीली दीवार के पीछे लटका है, माघ के शुक्ल पक्ष का चाँद, जो पूनम से होते हुए आज चौथ पर एक चौथाई कम हो गया…
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