प्राचीन ग्रीस की कहानी है। वहाँ के एक बड़े दार्शनिक हुए हैं, सुकरात। एक बार कोई परिचित उनके पास आए। आते ही बड़ी आतुरता से कहने लगे,…
View More एक किस्सा..पीठ पीछे की बातों में दिलचस्पी लेने, यकीन करने वालों के लिए!Category: चहेते पन्ने
बुद्ध बताते हैं, दु:ख से छुटकारा पाने का सही मार्ग क्या है
एक दिन बुद्ध प्रवचन देने के लिए अपने शिष्यों की सभा में पहुँचे। सभी शिष्य यह देख आश्चर्यचकित रह गए कि बुद्ध अपने साथ एक…
View More बुद्ध बताते हैं, दु:ख से छुटकारा पाने का सही मार्ग क्या हैस्वामी विवेकानन्द का पुण्य-स्मरण, उनके जीवन से जुड़ी चार कहानियों के जरिए
1. इसलिए माँ का स्थान सबसे ऊपर : स्वामी विवेकानन्द जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, “माँ की महिमा संसार में किस कारण से गाई…
View More स्वामी विवेकानन्द का पुण्य-स्मरण, उनके जीवन से जुड़ी चार कहानियों के जरिएपहले मुर्गी आई या अंडा, ये महज़ एक पहेली नहीं है!
उसके घर के बाहर चबूतरे पर कुछ बच्चे बैठे-ठाले पहेलियाँ बुझा रहे थे। इन्हीं में से एक पहेली थी, “मुर्गी पहले आई या अंडा आया।” पूछने…
View More पहले मुर्गी आई या अंडा, ये महज़ एक पहेली नहीं है!हम अपने रत्नों का सही सम्मान करना कब सीखेंगे?
ये तस्वीर अपने आप में बहुत कुछ कहती है। वाराणसी की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र। शहनाई का दूसरा नाम कहे जाने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह…
View More हम अपने रत्नों का सही सम्मान करना कब सीखेंगे?कबीर की वाणी, कोरोना की कहानी…साधो ये मुर्दों का गाँव…!
आज संत कबीरदास जी की जयन्ती है। ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि। सन् 1398 में कबीरदास जी का जन्म हुआ, ऐसा बताया जाता है। मतलब आज…
View More कबीर की वाणी, कोरोना की कहानी…साधो ये मुर्दों का गाँव…!प्रश्न है, सदियाँ बीत जाने के बाद भी बुद्ध एक ही क्यों हुए भला?
त्यागना। इसे सामान्य भाषा में हमेशा के लिए किसी चीज को छोड़ देना कह देते हैं। जैसे दान देना भी त्याग है। वैसे, अक्सर हम धन त्यागने…
View More प्रश्न है, सदियाँ बीत जाने के बाद भी बुद्ध एक ही क्यों हुए भला?धर्म-पालन की तृष्णा भी कैसे दु:ख का कारण बन सकती है?
भगवान बुद्ध दुःख के कार्य-कारण बताते हैं। इसमें दुःख समुदाय, यह दूसरा आर्यसत्य है। दुःख है तो दुःख के कारण भी होते ही हैं। इन कारणों को…
View More धर्म-पालन की तृष्णा भी कैसे दु:ख का कारण बन सकती है?बाबू , तुम्हारा खून बहुत अलग है, इंसानों का खून नहीं है…
देवास के जवाहर चौक में एक ही बड़ी सी दुकान थी झँवर सुपारी सेंटर। मंगरोली सुपारी वहीं मिलती थी, जिसे काटो तो नारियल जैसी लगती थी। घर में एक…
View More बाबू , तुम्हारा खून बहुत अलग है, इंसानों का खून नहीं है…हम भोजन को भगवान मानते हैं और रोज उनका तिरस्कार करते हैं!
उसका घर कॉलोनी के नुक्कड़ पर है। सामने तीन तरफ़ जाने वाले रास्ते तिकोने से जुड़ते हैं। वहीं एक तरफ़ उस रिहाइश (कॉलोनी) का दरवाज़ा है।…
View More हम भोजन को भगवान मानते हैं और रोज उनका तिरस्कार करते हैं!