सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
यूपीआई (एकीकृत भुगतान इन्टरफेस) से हर भुगतान के बाद अब बार-बार अपने खाते की बची हुई राशि देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) अब ऐसी सुविधा देने जा रहा है कि हर लेन-देन के बाद बैंक खाते में बची हुई राशि (बैलेंस) उपयोगकर्ता को अपने आप ही दिख जाए। इसी एक अगस्त, शुक्रवार से यह सुविधा शुरू हो जाएगी, ऐसा बताया जा रहा है। और शुरू में कोई तकनीकी दिक्कत आई भी तो अगले दो-पाँच दिन में सुचारू रूप से सुविधा सबको मिलने लगेगी, यह माना जा सकता है।
अलबत्ता फिर भी, अगर कोई आदतन या पिछली बार लेन-देन करते वक्त देखना भूल जाए इसलिए अपने बैंक खाते की बची हुई राशि देखना भी चाहे, तो उस पर कोई रोक नहीं होगी। बस, ऐसा करने की एक सीमा जरूर अब तय कर दी गई है। दिनभर में 50 बार से अधिक कोई खुद होकर यूपीआई पर अपने बैंक खाते की बची हुई राशि नहीं देख सकेगा।एनपीसीआई एक अगस्त से इस तरह के कुछ और बदलाव भी करने जा रहा है। नीचे उसकी सूची दी गई है, गौर किया जा सकता है, क्योंकि यह तो हम सभी के काम की बात ही है न?
1- दिनभर में अधिकतम 50 बार ही बैंक खाते में बची हुई राशि देखी जा सकेगी, यह तो बता दिया। अब यह जान लीजिए कि ऐसा क्यों किया जा रहा है? इसलिए ताकि एपीआई (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इन्टरफेस) पर दबाव कम किया जा सके। या सीधी भाषा में कहें तो यूपीआई एप के काम करने की गति तेज की जा सके। खास तौर पर उस वक्त जब सबसे अधिक लेन-देन किया जाता है, यानि पीक आवर्स के समय।
2- कई लोग यपूीआई एप पर ही ऐसा बन्दोबस्त कर देते हैं कि जीवन बीमा, क्रेडिट कार्ड, बिजली का बिल, या किसी निवेश योजना, आदि में निश्चित तारीख पर तयशुदा भुगतान अपने आप हो जाए। इसे ऑटो पेमेन्ट कहते हैं। इसमें अब यह किया जा रहा है कि ऑटो पेमेन्ट की सुविधा सुबह 10 बजे से पहले ही रात को 9.30 बजे के बाद ही रहेगी। मतलब दिन में 10 बजे से रात को 9.30 तक कोई ऑटो पेमेन्ट नहीं होगा।
3- कुछ लोग अपने बैंक खाते से जुड़े विवरण ही बार-बार यूपीआई एप से देखते रहते हैं। कभी आदतन या कभी किसी कारण से। इससे यूपीआई एप की रफ्तार धीमी होती है। लिहाजा, यह काम अब दिनभर में 25 से अधिक बार नहीं हो सकेगा। और हाँ, ये जो 50 बार-25 बार वाला आँकड़ा अभी निर्धारित किया गया है न, ऐसा मानकर चलिए कि धीरे-धीरे यह आगे चलकर लगातार कम ही होता जाएगा। सो, आदत बदल लें।
4- भुगतान अपनी तरफ से किए जाने के बाद भी कई बार अटक जाता है। ऐसे में हमारी जिज्ञासा होती है कि कई पैसा फँस तो नहीं गया। जहाँ हम पहुँचाना चाहते हैं, वहाँ पहुँचा या नहीं। कब तक पहुँचेगा। इस तरह के भुगतान की स्थिति देखने के लिए भी सीमा तय कर दी गई है। दिनभर में सिर्फ तीन बार। वह भी हर बार 90 सेकेण्ड के अन्तराल से। और हाँ, यूपीआई एप पर 25 से अधिक खाते भी नहीं जुड़ सकेंगे।
5- यूपीआई के जरिए जिसको भुगतान किया जा रहा है, उसका नाम भी अब सभी एप्लीकेशन पर नजर आएगा, जैसा कि उसके बैंक खाते के साथ दर्ज होगा। एनपीसीआई ने यूपीआई एप संचालित करने वाली सभी कम्पनियों के लिए ऐसा करना अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा एक सुविधा और दी जानी है, लेकिन उसमें कुछ समय लगेगा। यह है, बायोमैट्रिक यानि चेहरे या हाथों की अँगुलियों के निशान की मदद से भुगतान की सुविधा। मतलब बार-बार पिन नहीं डालनी होगी। यह सुविधा अमल में लाने पर अभी काम चल रहा है।
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