सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
अगर लड़कियों और महिलाओं को लगता है कि कोई कानून या सरकार उन्हें मुकम्मल सुरक्षा दे पाएगी, तो उन्हें अपनी सोच में सुधार करना चाहिए। क्योंकि ऐसा नहीं होगा। पूरी दुनिया में कहीं भी, किसी देश में सरकार या कानून के भरोसे महिलाओं की मुकम्मल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो रही है। इसका ताजातरीन उदाहरण है, मैक्सिको का। वहाँ की राष्ट्रपति क्लॉडिया शेनबाम भी एक ‘दुष्कर्मी मनोरोगी’ की हरकत का शिकार हो गईं हैं। उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। नीचे दिया गया है, देखा जा सकता है।
अपने साथ हुए इस हादसे के बाद शेनबाम ने बुधवार, पाँच नवम्बर को न सिर्फ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, बल्कि महिलाओं के उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े कानूनों की समीक्षा करने और उन्हें अधिक सख्त बनाने का ऐलान भी किया हे। महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाने की भी उन्होंने घोषणा की है। लेकिन सवाल फिर वही कि क्या इससे महिलाओं की मुकम्मल सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी? तो जवाब है नहीं। क्यों? क्योंकि महिलाओं का यौन उत्पीड़न वास्तव में एक मानसिक विकार है, मनोरोग है, जो सामान्य से लेकर शीर्ष तक किसी भी स्तर के व्यक्ति में हो सकता है। होता ही है। और वह इसकी रौ में हरकत कर जाता है।
तो फिर क्या समाधान है इसका? कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू से सामने आए दो वीडियो में इसका जवाब है। दोनों वीडियो नीचे दिए गए हैं। पहले में एक व्यक्ति कर्नाटक सड़क परिवहन निगम की बस में अपने बगल में बैठी महिला के साथ छेड़खानी कर रहा है। महिला हिम्मत कर के उसकी हरकतें काबू से बाहर होने तक अपने मोबाइल फोन में उस सबकी रिकॉर्डिंग कर लेती है। और फिर जब वह हद से आगे बढ़ने लगता है, तो उसका हाथ झटक कर उसकी वहीं पिटाई कर देती है। बाद में अन्य लोग छेड़खानी करने वाले को पीटते हुए बस से उतारकर पुलिस को सौंप देते हैं। सोशल मीडिया पर भी वीडियो डाला जाता है।
इसी तरह, दूसरे वीडियो में देखिए। अभी कुछ दिनों पहलेी ही बेंगलुरू में नौकरी करने आई लड़की रैपिडो बाइक से दफ्तर से अपने घर जा रही है। रास्ते में बाइक सवार उसे गलत इरादे से छूता है। लड़की घबराई हुई है। फिर भी वह हौसला कर के उस मोटरसाइकिल चालक की हरकतें मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लेती है। बाद में घर पहुँचकर पूरी घटना की जानकारी वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर भी डाल देती है। इसके बाद बेंगलुरू पुलिस और रैपिडो बाइक सर्विस वालों ने उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही है।
यानि इन तीनों घटनाओं को एक साथ लाने का सन्देश स्पष्ट है। यह कि जब एक देश की सरकार के सबसे ऊँचे राष्ट्रपति पद पर बैठी महिला भी दुष्कर्मी मनोरोगी मानसिकता वालों का शिकार हो सकती है, तो सोचिए कोई कानून या सरकार क्या ही कर लेगी! इसलिए वही कीजिए, जो बेंगलुरू की दोनों महिलाओं ने किया। आज सभी के हाथ में फोन है। सब वीडियो बनाना, तस्वीरें लेना जानते हैं। सबकी सोशल मीडिया तक पहुँच है। हर किसी के पास इन्टरनेट है। इस सबका इस्तेमाल कीजिए। दुष्कर्मी मनाेरोगियों का पर्दाफाश कीजिए।
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