सुख तो इन छह स्थितियों में है, तो क्या हम सुविधाओं के पीछे भागने के कारण दुखी हैं?

टीम डायरी

हम सबको सुख चाहिए, पर मिलता नहीं। आखिर क्यों? जबकि सच्चा सुख तो सामान्य सी इन छह स्थितियों में ही मिल सकता है। नीचे दिए गए वीडियो में मशहूर कथावाचक पुण्डरीक गोस्वामी जी की बात पर गौर कीजिए। वह महाभारत में ‘विदुर नीति’ के तहत कहे गए एक श्लोक का जिक्र कर रहे हैं। उसमें सुखी होने के लिए छह स्थितियाँ बताई गई हैं। पहली– अगर हमारे पास अपनी आवश्कताओं (इच्छाओं नहीं) की पूर्ति के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है। दूसरी– हम रोग, आदि से मुक्त हैं। तीसरी- पति-पत्नी के बीच परस्पर प्रेम है। चौथी- पत्नी समझदार, मृदुभाषी है। पाँचवीं– सन्तान आज्ञा मानने वाली है। और छठवीं स्थिति– हम किसी ऐसी कला या कौशल में माहिर हैं, जो विपत्तिकाल में हमारे लिए भरण-पोषण का साधन बन सके। यदि ये छह स्थितियाँ हैं, तो व्यक्ति सुखी कहा जाता हे।

इन छह स्थितियों को सुनिश्चित कर पाना किसी के लिए कोई मुश्किल बात नहीं है। इस हिसाब से कोई भी व्यक्ति सुखी हो सकता है। अपने लिए सुखमय जीवन का इंतजाम कर सकता है। लेकिन आज के दौर में ऐसा हो नहीं पा रहा है। आज हर व्यक्ति दुखी नजर आता है। तनाव, अवसाद में दिखाई देता है। आखिर क्यों? क्या इसलिए हमने सुख के बजाय सुविधाओं को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है? आवश्यकताओं के बजाय इच्छाओं, आकांक्षाओं, की पूर्ति करने की कोशिश में लगे हैं? निश्चित रूप से इसका जवाब ‘हाँ’ में ही होना चाहिए। 

अगर सच में, इस प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ में है, तो फिर आत्ममंथन कीजिए। अपने में सुधार कर सकें, तो वह तुरन्त कीजिए। अन्यथा सुख की आकांक्षा छोड़ ही दीजिए फिर।   

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Neelesh Dwivedi

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