टीम डायरी, 25/3/2020
जिस उम्र में लोग आधुनिकता और दुनियावी चमक-दमक के पीछे भागते हैं, उस उम्र में कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो संस्कृत और संस्कृति को चमका रहे हैं। उसे निखार रहे हैं। उसकी नई परिभाषाएँ गढ़ रहे हैं।
ऐसे युवाओं में कुछ नाम हैं – शुभम आर्यन्, गौरव मलिक, शौर्य नान्दल और संजू नान्दल। इन युवाओं ने 25 मार्च को ही एक वीडियो ज़ारी किया है। होली के अवसर पर, संस्कृत भाषा में, भारतीय संस्कृति के रंगों से सजे पर्व की शुभकामनाएँ देने के लिए।
वीडियो में सुने जा रहे गीत के बोल हैं…
भक्तिप्रसक्तिकृत्सौहार्दजाला बालवलीलावली प्रतिभाति
सुस्वाभिमानश्रीमण्डितभालं चन्दनवन्दितपदभा विभाति
रङ्गयुता ननु चन्द्रमुखा सा मानप्रिया मे प्रिया प्रतिभाति
संस्कृतिसभ्यतारंजितहोलिका
भारतभासरता परिभाति।।
इसका गीत का अर्थ है…
“भक्ति के प्रसार से उत्पन्न, सद्भावना से युक्त बालक की अनेक लीलाएँ दिखाई दे रही हैं।
स्वाभिमान, तेज से मण्डित मस्तक, एवं चन्दन से पूजा किए हुए चरण देदीप्यमान दिख रहे हैं।
रंगों से रंजित व चन्द्रमा के समान मुख वाली मेरी प्रिया दिख रही है।
अहो! संस्कृति सभ्यता के रंग से रँगी हुई एवं भारत के तेज से युक्त यह होली दिख रही है।”
इस गीत की शब्द-रचना शुभम की है। अभिनय गौरव, शौर्य और संजू ने किया है। संगीत ज्योत्सना आर्य और शुभम ने दिया है।
जो समझ सके, उसके लिए यह सब कुछ अद्भुत सा होगा, बल्कि है। इसका प्रमाण ये है कि इस गीत को शुरुआती दो घंटे में ही इन युवाओं के यू-ट्यूब चैनल वेवमैक्स (Wave Mix) पर करीब 350 बार देखा जा चुका है।
चूँकि #अपनीडिजिटलडायरी का भी भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, अभिव्यक्ति, अनुशासन, सद्भाव, जैसे विषयों से ‘सरोकार’ है। इसलिए इन युवाओं की अनुमति से उनका यह वीडियो डायरी पर भी लाया गया है। पूरे आभार के साथ। उन्हें और उनके जैसे तमाम युवाओं को शुभकामनाओं के साथ भी। क्योंकि जो ये कर रहे हैं, वह न तो सहज है, न सरल ही। बड़े समर्पण, निष्ठा और प्रतिबद्धता के बाद ऐसा थोड़ा कुछ हो पाता है।
इसके लिए इन युवाओं के आचार्य और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉक्टर वाचस्पति मिश्र का विशेष आभार। क्येांकि वे युवाओं को ऐसा कुछ करने के लिए न सिर्फ मार्गदर्शन दे रहे हैं, बल्कि सहयोग भी कर रहे हैं।
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(नोट : यह वीडियो या इससे जुड़ी सामग्री #अपनीडजिटलडायरी या वेवमैक्स चैनल के संचालकों की अनुमति के बिना जस की तस उठाना या उसकी नकल करना आपराधिक कृत्य माना जा सकता है।)
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