संस्कार हमारे जीवन में कैसे अच्छी या बुरी भूमिका निभाते हैं?

खुशी अरोड़ा, नई दिल्ली से

संस्कार एक ऐसा शब्द है, जो हम अपने बचपन से ही और अभी भी रोज कहीं न कहीं सुनते ही रहते हैं। संस्कार का हमारे जीवन में एक महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। संस्कार के भी दो प्रकार होते हैं। पहला- अच्छे संस्कार व दूसरा- बुरे संस्कार। इनके बीच अन्तर जानना बेहद अहम है। तो आइए आगे जानते हैं…

सर्वप्रथम हम अच्छे संस्कारों को समझते हैं। अच्छे संस्कार हमें हमेशा हमारे माता-पिता व गुरुजनों से मिलते हैं। अच्छे संस्कार मनुष्य को सभ्य व ईमानदार बनाने में प्रयोग किए जाते हैं। अच्छे संस्कार जिस मनुष्य के जीवन में होते हैं, वह हमेशा अच्छे रास्ते की ओर अग्रसर होते हैं। अच्छे संस्कार हमें हमेशा अनुशासित बनाने में मदद करते हैं। दूसरी ओर अगर हम बात करें बुरे संस्कारों की, तो वे हमेशा हमें बुरे व्यक्तियों से ही मिलते हैं। बुरे संस्कार हमारी बुद्धि को नष्ट और भ्रष्ट करने में प्रयोग किए जाते हैं। बुरे संस्कारों को प्राप्त कर हमारा मन विचलित होता है। बुरे संस्कार हमें असभ्य व बुरा व्यक्ति बनाते हैं। इन संस्कारों को प्राप्त कर हम भी फिर बुरे कामों की ओर अग्रसर हो जाते हैं, जो हमें ही भविष्य में ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।

इसीलिए बुजुर्ग हम सब से हमेशा कहते हैं कि अच्छे संस्कारों को ग्रहण करना चाहिए। क्योंकि यह हमें अच्छा जीवन व अच्छे गुण प्रदान करते हैं। और इन संस्कारों को प्राप्त कर हर व्यक्ति अपने भविष्य में अवश्य सफल होता है। वह साथ ही दूसरों को भी अच्छे संस्कार प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है, जो सबके लिए ही लाभदायक होते हैं।

आप सब लोगों का तहे दिल से धन्यवाद कि आप मेरे विचार पढ़ रहे हैं।
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(नोट : खुशी दिल्ली के आरपीवीवी सूरजमल विहार स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ती हैं। उन्होंने ‘अपनीडायरीलिखिए’ सेक्शन में लिखकर यह पोस्ट #अपनीडिजिटलडायरी तक पहुँचाई है। वह डायरी की पाठकों में से एक हैं।)

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