हैलमेट की जगह सिर पर कड़ाही! ऐसे कानून काे चकमा दे सकते हैं, मौत को कैसे देंगे?

टीम डायरी

पिछले कुछ दिनों से एक तस्वीर सोशल मीडिया और मीडिया पर काफी सुर्खियों में है। यह तस्वीर बेंगलुरू की बताई जाती है। इसमें एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा शख्स हैलमेट की जगह सिर पर कड़ाही रखे हुए है! वह भी दिनदहाड़े और व्यस्त यातायात के बीच। और क्यों? पुलिस तथा कानून को चकमा देने के लिए!! क्योंकि बेंगलुरू जैसे कई शहरों में दोपहिया वाहन पर बैठे दोनों सवारों के लिए हैलमेट अनिवार्य है। न लगाने पर जुर्माना लगया जाता है। लिहाजा, जुर्माने से बचने के लिए लोग तरह-तरह के जुगाड़ निकालते हैं। 

कभी-कभी कोई क्रिकेट खिलाड़ियों का हैलमेट सिर पर रखकर चल देता है। कभी कोई को निर्माण कार्यों के दौरान कामगारों द्वारा पहना जाने वाला हैलमेट ही सिर पर धर लेता है। कई बार टूटा-फूटा जर्जर हैलमेट ही सिर पर रखे हुए लोग दोपहिया वाहन चलाते दिख जाते हैं। यही नहीं, स्थानीय प्रशासन कभी-कभी सख्ती बरतने के लिए बिना हैलमेट पेट्रोल न देने का आदेश पारित कर देता है। तब ऐसे आदेशों की अवधि के दौरान पेट्रोल पम्पों पर बेहद हास्यास्पद स्थितियाँ बन जाती हैं। जो लोग हैलमेट नहीं लगाए होते हैं, वे आस-पास से किसी का हैलमेट ले लेते हैं। सिर पर या कभी तो वाहन के हत्थे पर ही, लटकाते हैं, पेट्रोल भरवाते है और हैलमेट जिससे लिया, उसे लौटाकर आगे चल देते हैं। पेट्रोल पम्प वाले ऐसे कारनामों में बराबरी के भागीदार होते हैं। 

 ऐसे मामलों में पुलिस, प्रशासन को जब मौका मिलता है, वह कार्रवाई करता है। लेकिन फिर भी मोटे तौर पर स्थितियाँ वैसी ही बनी रहती हैं क्योंकि हिन्दुस्तान के आम नागरिक यह समझना ही नहीं चाहते कि दोपहिया वाहन चलाते समय सिर पर हैलमेट कानून को या पुलिस से बचने के लिए नहीं होता, बल्कि किसी हादसे के दौरान जान बचाए रखने के लिए होता है। लेकिन कोई समझे, तब न? भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोग जान गँवाते हैं। साल 2024 में ही 4.7 लाख लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई है। इनमें से अधिकांश दोपहिया वाहन चालक थे, जो हैलमेट न लगाने की वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठे। 

इसीलिए कड़ाही सिर पर रखकर पुलिस और कानून को चकमा देने की कोशिश करने वालों के लिए एक सवाल तो बनता है। यह कि इस तरह आप कानून, पुलिस को चकमा दे सकते हैं एक बार, मगर मौत को कैसे देंगे? सोचिएगा, इसका कोई जवाब मिल सके तो। मिलेगा नहीं अलबत्ता।  

 

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Neelesh Dwivedi

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