देश से ज्यादा ‘अमीर’ हो गए पाँच भारतीय राज्य! यह कैसे हुआ आखिर?

टीम डायरी

एक ताजा रपट आई है। यह बताती है कि पाँच भारतीय राज्य देश से भी ज्यादा ‘अमीर’ हो गए हैं। और यह रपट विश्व बैंक ने जारी की है। दरअसल, विश्व बैंक प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर विभिन्न देशों को अलग-अलग आय समूहों में बाँटता है। इसके हिसाब से 1,175 डॉलर (करीब 1.12 लाख रुपए) प्रति वर्ष से कम प्रतिव्यक्ति आय वाले देशों को निम्न आय वर्ग में रखा जाता है, यानि गरीब माना जाता है। जबकि 14,375 डॉलर (लगभग 13.70 लाख रुपए) सालाना की प्रतिव्यक्ति आय वाले देशों को उच्च आय वर्ग में रखा जाता है। मतलब अमीर देशों में।

इन दोनों के बीच में तीन श्रेणियाँ हैं। पहली- निम्न मध्यम आय वर्ग, दूसरी- मध्यम आय वर्ग और तीसरी- उच्च मध्यम आय वर्ग। इनमें से हर साल 4,635 डॉलर (यही कोई 4.41 लाख रुपए) तक प्रतिव्यक्ति आय वाले देशों या राज्यों को निम्न मध्यम आय वर्ग में रखा जाता है। इन श्रेणियों के हिसाब से राष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिव्यक्ति आय चूँकि 2,760 डॉलर (करीब 2.63 लाख रुपए) प्रतिवर्ष है। इसलिए उसे निम्न मध्यम आय वर्ग में रखा गया है। लेकिन, देश के भीतर पाँच राज्य ऐसे हैं, जो भारत के इस राष्ट्रीय औसत से काफी आगे हैं।

इन राज्यों में से पहला नाम है दिल्ली (6,217 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय) का। फिर कर्नाटक (5,579 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय), तेलंगाना (5,407 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय), तमिलनाडु (5,329 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय) और गुजरात (4,734 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय) का क्रम है। इनके अलावा तीन और राज्य- महाराष्ट्र (4,628 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय), हरियाणा (4,627 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय) और केरल (4,610 डॉलर प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति आय), मध्यम आय वर्ग से उच्च मध्यम आय वर्ग में शामिल होने की कगार पर हैं।

मतलब देश के सात राज्य ऐसे हैं, जो प्रतिव्यक्ति आय के मामले में पूरे देश के राष्ट्रीय औसत से काफी आगे हैं। जबकि प्रतिव्यक्ति के इसी आधार सूत्र के हिसाब से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखण्ड को देश के सबसे गरीब राज्यों की श्रेणी में रखा गया है। सो, अब यह भी जान लेना कारगर होगा कि आखिर ये हुआ कैसे? साथ में यह भी कि प्रतिव्यक्ति आय निकालते कैसे हैं? तो जवाब यह हे कि प्रतिव्यक्ति आय निकालने के लिए उस क्षेत्र-विशेष के लोगों की औसत सालाना आमदनी को वहीं की जनसंख्या से विभाजित कर दिया जाता है। जो परिणाम हासिल हो, वह ‘प्रतिव्यक्ति आय’ कहलाती है। इसके अलावा कुल जनसंख्या को सम्बन्धित क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आँकड़े से विभाजित करने पर भी प्रतिव्यक्ति आय हासिल की जा सकती है। यानि जनसंख्या कम-ज्यादा होने का मामला वास्तव में किसी क्षेत्र की गरीबी-अमीरी का स्तर तय करने में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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Neelesh Dwivedi

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