केरल अति-गरीबी से मुक्ति की घोषणा करने वाला है, लेकिन क्या सच में ऐसा हुआ है?

टीम डायरी

इसी एक नवम्बर को केरल ‘अति-गरीबी’ से पूरी तरह मुक्त होने की घोषणा करने वाला है। यानि वहाँ कोई भी व्यक्ति या परिवार ‘अति-गरीब’ की श्रेणी में अब नहीं है, ऐसा राज्य सरकार का दावा है। हालाँकि, इस दावे में सच्चाई कितनी है और कितनी नहीं, इस पर आगे बात करेंगे, लेकिन इसे अगर ‘उपलब्धि’ मान लें तो इसका श्रेय लेने की होड़ जरूर वहाँ शुरू हो गई है। राज्य सरकार तो ‘उपलब्धि’ का श्रेय लेने के लिए ही ‘जलसा’ करने जा रही है, मगर उससे पहले भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर ने इस पर दावा ठोक दिया है। 

चन्द्रशेखर का कहना है कि जब से “केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार आई है, देशभर में ‘अति-गरीबी’ का प्रतिशत 16.2 से घटकर 2.3 पर आ गया है। मोदी सरकार ने 10 साल में लगभग 17 करोड़ लोगों को इस स्थिति से बाहर निकाला है। केरल भी अगर आज ‘अति-गरीबी’ की स्थिति से मुक्ति का दावा कर रहा है, तो उसका श्रेय वास्तव में केन्द्र सरकार की योजनाओं को जाता है, न कि राज्य सरकार की योजनाओं को।” उन्होंने सवाल भी पूछे, “केरल में 2013-14 में 1.24 प्रतिशत (लगभग 2.72 लाख) लोग ‘अति-गरीब’ थे। अगर राज्य सरकार की योजनाएँ इतनी ही अच्छी थीं, तो इतने कम प्रतिशत लोगों को भी ‘अति-गरीबी’ की स्थिति से बाहर निकलने में 10 साल क्यों लगे?” 

दूसरी तरफ, आदिवासियों के बीच सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी राज्य सरकार के दावे पर सवाल उठाए हैं। दिलचस्प बात है कि ये सवाल भी वायनाड क्षेत्र से उठे हैं, जो कांग्रेस नेता राहुल गाँधी का संसदीय चुनाव क्षेत्र रहा है। वायनाड में केरल की सर्वाधिक आदिवासी आबादी है, ऐसा बताया जाता है। वहाँ जनजातीय समुदाय के बीच सक्रिय कार्यकर्ता मणिकुट्‌टन पणियन बताते हैं, “हमारे यहाँ अब भी लोग भीषण गरीबी और भुखमरी जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। लोगों को एक वक्त का भोजन तक नसीब नहीं हो पा रहा है।” 

उनका दावा है, “केरल के 90 प्रतिशत आदिवासियों के पास अब भी जमीन नहीं है। रहने के लिए घर नहीं है। लोग प्लास्टिक से ढँके झोपड़ों में रहते हैं। उनके पास बिजली नहीं है। शौचालय नहीं है। पीने का पानी नहीं है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं हैं। ऐसे में कोई कैसे ‘अति-गरीबी’ से मुक्ति की घोषणा कर सकता है?” ‘आदिवासी वनिता प्रस्थानम’ नामक संगठन की नेता के. अम्मिनी ने भी मणिकुट्‌टन का समर्थन किया है। 

यद्यपि इसके बावजूद एक नवम्बर को सरकार ‘जलसा’ करने वाली है। इसमें मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के अलावा दक्षिण की फिल्माें के कुछ चर्चित सितारे भी मौजूद रह सकते हैं। जैसे- कमल हासन, ममूटी, मोहनलाल, आदि। यहीं पर यह भी बताते चलें कि विश्व बैंक के निर्धारित मानकों के अनुसार ‘अति-गरीब’ की श्रेणी में उन्हें रखा जाता है जिनकी दैनिक आय 3 डॉलर (करीब 265 रुपए) से भी कम हो और जिनको रोटी-पानी, कपड़ा-मकान,आदि की मूलभूत न्यूनतम सुविधाएँ भी मुहैया न हो पाती हों।   

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Neelesh Dwivedi

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