मिले सुर मेरा तुम्हारा…भाषा-विवाद पर ये हास्य-व्यंग्य सुनें, कोशिश करें कि…सुर बने हमारा!

टीम डायरी

देश आज आजादी के 78 साल पूरे कर चुका है, 79वें साल में प्रवेश कर गया है। सभी को शुभकामनाएँ। आजाद भारत ने इस दौरान न जाने कितने बदलाव देखे हैं। न जाने कितने बन्धनों और जकड़नों को तोड़ा है। हालाँकि, अब भी भाषाई और क्षेत्रीय विवाद की जकड़नों से देश बँधा हुआ लगता है। तभी तो अक्सर किसी न किसी कोने से इस तरह के विवाद सुर्खियाँ बनते रहते हैं। खास तौर पर हिन्दी का विरोध को जब चाहे, महाराष्ट्र से आगे दक्षिण के सूदूर कोने तक क्षेत्रीय सियासत का केन्द्रीय मुद्दा बन जाता है। जबकि आज देश जब दुनिया के शीर्ष देशों में अपनी जगह बनाने के लिए तैयार है, तत्पर है, तब सबसे पहली जरूरत है भारतीयता की भावना की। 

नीचे जो वीडियो दिया गया है, उसमें जानी-मानी हास्य कलाकार श्रद्धा जैन अपनी प्रतिभा, अपने कौशल और अपने कार्यक्रम के जरिए हमें यही सन्देश देने की कोशिश कर रही हैं। सुनिएगा। वीडियो महज आठ मिनट का है। छोटा सा। कार्यक्रम का नाम भी ‘सो मिनी थिंग्स’ है। लेकिन सन्देश बहुत बड़ा है।   

श्रद्धा ने अपने कार्यक्रम में यह सार्थक सन्देश देने के लिए मशहूर गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ को मुख्य विषय-वस्तु बनाया है। यह गीत 15 अगस्त 1988 को जारी किया गया था, दूरदर्शन पर। ‘भारत रत्न’ पंडित भीमसेन जोशी जी ने इस गीत को संगीतबद्ध किया था। स्वयं पंडित भीमसेन जी और ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर जी से लेकर कला-साहित्य, नृत्य, फिल्म, संगीत, खेल, राजनीति, आदि विभिन्न क्षेत्रों की 55 से अधिक हस्तियों ने इस गीत के फिल्मांकन में शिरकत की थी। गीत, संगीत, आवाज, अभिनय से अपना योगदान दिया था। ‘अनेकता में एकता, हिन्द की विशेषता’ का सन्देश दिया था। आज फिर उसी सन्देश को याद करने आत्मसात करने की जरूरत है। नीचे वह मूल वीडियो भी दिया गया है। सुनिएगा, महसूस कर सके, तो आज भी आँखें नम हो जाएँगी।

स्वतंत्रता दिवस भी फिर शुभकामनाएँ।  

 

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Neelesh Dwivedi

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