बृजेश सोलंकी उत्तर प्रदेश के राज्यस्तरीय कबड्डी खिलाड़ी थे।
टीम डायरी
कुत्ते-बिल्ली पालने का शौक बहुत से लोगों को होता है। कई लोग तो उन्हें घरों के भीतर एक सदस्य की तरह रखते हैं। लाड़-दुलार करते हैं। साथ में खाते-सुलाते हैं। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो सड़कों पर घूमने वाले कुत्ते, बिल्लियों, बन्दरों, आदि के लिए कुछ न कुछ भला करते रहते हैं। ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन यह ध्यान रखना हमेशा बहुत जरूरी है कि इन जानवरों के साथ भला व्यवहार करते समय भी पर्याप्त सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। वरना जान के लाले पड़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में बुलन्दशहर के खुर्जा में अभी हाल ही एक चिन्ताजनक घटना हुई है। वहाँ राज्य स्तरीय कबड्डी खिलाड़ी 22 वर्षीय बृजेश सोलंकी रहा करते थे। राष्ट्रीय स्तर के उभरते खिलाड़ियों में उनका नाम होने लगा था। इसी जून महीने में एक रोज जब वे अपने खेल के दैनिक अभ्यास के बाद घर लौट रहे थे, तो रास्ते में उन्होंने एक कुत्ते के बच्चे को नाली में फँसा देखा। उन्हें दया आ गई और उन्होंने उसे नाली से निकाल कर बचाया। लेकिन इसी कुत्ते के बच्चे ने उनके हाथ में काट लिया। बृजेश ने इस मामले को गम्भीरता से नहीं लिया।
बृजेश के प्रशिक्षक प्रवीण कुमार और भाई सन्दीप कुमार के मुताबिक, चोट के प्रति जरा सी लापरवाही से इस खिलाड़ी की जान पर बन आई। शुरुआत में बृजेश के हाथों में दर्द हुआ। फिर भी उन्होंने कुत्ते के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारी रेबीज से बचाव का टीका नहीं लगवाया। फिर अचानक कुछ दिनों बाद उन्हें पानी से डर लगने लगा। यहाँ तक कि बृजेश डर के कारण पानी पीने से भी बचने लगे। तब घरवालों का उनकी हालत पर ध्यान गया। वे उन्हें स्थानीय सरकारी अस्पताल ले गए। मगर वहाँ कुछ पता नहीं चल पाया।
इसके बाद बृजेश को अलीगढ़ और फिर दिल्ली ले जाया गया। वहाँ भी स्पष्टता से कोई जानकारी नहीं मिली। तब फिर नोएडा के निजी अस्पताल में उन्हें दिखवाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि बृजेश को रेबीज हो चुका है और इसका कहीं, कोई इलाज नहीं है। सबकी आँखों के सामने तड़प-तड़प कर मरना ही ऐसे मरीजों की नियति होती है। हालाँकि, घरवालों ने हिम्मत नहीं हारी। वे बृजेश को मथुरा में किसी बाबा के पास ले जाने लगे। लेकिन रास्ते में ही परिजनों के सामने तड़प-तड़प कर उनकी 28 जून, शनिवार को मौत हो गई।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बृजेश के गाँव का दौरा किया है। वहाँ करीब 29 लोगों को रेबीज से बचाव का टीका लगाया गया है। साथ ही जनसामान्य को जागरूक भी किया जा रहा है कि कुत्ते, बिल्लियों, बन्दरों, आदि से बचकर रहें। इनके साथ व्यवहार करते समय सावधानी बरतें।
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