नि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!

संदीप साहनी, जयपुर, राजस्थान, 15/5/2022

भूपेन हजारिका के एक गाने की पंक्तियाँ याद आ रही हैं… 

“निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ” .

नारी और नदी, सदियों से निःशब्द बहती आ रही हैं। जन्म से मीठी निकली पर दुनियाभर का जल, मल अपने आप में समेटे, सागर तक पहुँच खारी हो विलीन हो जाती हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की एक रिपोर्ट है। यह बताती है कि देश की 45% महिलाओं और 44% पुरुषों का यह मानना है कि अगर पत्नी घर की देखभाल नहीं करती, पति से बहस करती है या पति को खुश करने से मना करती है, तो उसे पीटा जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे आप अपने घोड़े को चाबुक मार देते हैं… या गाय, भैंस, कुत्ते को मार देते हैं। जानवर हैं न, आपकी मर्ज़ी के हिसाब से नहीं चलेंगे तो पिटेंगे ही। आप मालिक जो ठहरे, वे गुलाम जो ठहरे।

पत्नी के ख़िलाफ़ यौन हिंसा में बिहार का प्रतिशत अधिक है, तो वैवाहिक बलात्कार में गोवा जैसे तथाकथित शिक्षित राज्य अग्रणी हैं। कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक आतंकियों का कहर सबसे पहले औरत पर टूटा है। हमारे भारत की ही कुछ जातियों में अब भी औरत का कौमार्य परीक्षण होता है। सुहागरात के बाद खून सनी चादर पंचायत को दिखाने के बाद ही औरत को चरित्रवान होने का प्रमाणपत्र मिलता है। एक पंच इस परीक्षण के पक्ष में यह फरमाते हैं कि पेटी में एक सड़ा हुआ आम, सारे आमों को खराब कर देता है। वैसे, ही एक बिगड़ी हुई लड़की सारे समाज को ख़राब कर सकती है, इसीलिये बड़ों का बनाए ये नियम ठीक हैं। 

इंटरनेशनल क्रिमिनिल कोर्ट ने 1998 में रेप को युद्ध से उपजी तकलीफ करार दिया। पर जब एक औरत उस कोर्ट के सामने यह कहती है कि उसके देश पर आक्रमण के समय विदेशी सैनिकों ने उसे, उसकी 10 साल की बेटी सहित सड़क पर हथकड़ियों से जकड़ दिया। सड़क पर आते-जाते हर आदमी ने उसका और उसकी बेटी का बलात्कार किया, तब ये इंसाफ के पहरेदार पूछते हैं कि “आप तब चीखे क्यों नहीं?” सही ही कहते हैं, आपकी हमारी अँगुली में सुई चुभ जाए तो आह निकल जाती है। फिर ये औरतें जो हर बात में पिटती हैं, बिकती हैं, दुत्कारी जाती हैं, तब “चीखती क्यों नहीं?”  एक नामचीन लेखक, एक औरत को 10 साल तक यह कहकर बिस्तर पर ले जाता रहा कि एक दिन तुमसे विवाह कर लूँगा। तब भी ठीक यही सवाल हम उससे पूछते हैं, “तुम इतने साल चुप क्यों थीं?” किसी औरत से बलात्कार हो जाए तो वो सबसे पहली प्रतिक्रिया उसे ही क़सूरवार ठहराने की होती है। तूने ही ऐसे कपड़े पहने थे, तू ही अकेले गई थी, तूने ही पुरुषों को दोस्त बना रखा था। और अन्त में वही सवाल, “तुम चुप क्यों थीं?” 

एक फेसबुकिये लेखक हैं। शब्दों पर ख़ासी पकड़ है। एक दिन लिखा उन्होंने कि महिलाएँ, उन्हें पीटने वाले, उन पर हावी होने वाले पुरुष को पसन्द करती हैं। कमजोर दब्बू टाइप पुरुष उन्हें पसन्द नहीं आते। मैंने उनके लेख पर आपत्ति की तो पुरुषों ने हँसी उड़ाई। और यह देखना अधिक दुःखद था कि उनकी इस पोस्ट पर लाल दिल टाँगने वाली महिलाएँ भी बहुत थीं। मैंने उन लेखक को तत्काल अनफ़्रेंड कर दिया।

ऐसे ही, एक बड़ी कम्पनी में काम करने वाली मेरी मित्र बताती हैं, “बड़ी कम्पनियों का कोई बहुत अलग हाल नहीं है। बॉस का गाहे-बगाहे रसीली बातें कर लेना, कभी आपको यहाँ-वहाँ छू लेना, आपको नज़रंदाज़ करना पड़ता है। ज़्यादातर ऐसे बॉस कम्पनी के कमाऊ पूत होते हैं। तो कम्पनी इन्हें कुछ नहीं कहती। अगर हम दूसरी कम्पनी में भी चले जाएँ तो अधिकतर सिर्फ़ नाम बदलता है, बाकी कुछ नहीं।

एक लेखिका ने बताया, “सुबह बस में सफ़र से लेकर रात को घर लौटने तक कितनी ही नज़रें बदन पर फिसलती रहती हैं। बेटे की उम्र से लेकर बाप की उम्र तक के आदमी चिपककर खड़े होने की कोशिश करते हैं। यहाँ-वहाँ छूने की कोशिश करते हैं। जब रात को घर पहुँचती हूँ तो रगड़-रगड़ कर इस गन्दगी को धोने के जतन करती हूँ।”

और हम फिर यही सवाल पूछेंगे कि “तुम तब बोली क्यों नहीं?”

“नेत्रविहीन दिक्षमौन हो क्यूँ 
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ?” 
——–
(संदीप जी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। विभिन्न विषयों पर लेखन में उनकी रुचि है। उन्होंने यह लेख हाल ही में फेसबुक पर लिखा था। इसे #अपनीडिजिटलडायरी पर उनकी अनुमति से लिया गया है।)

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

View Comments

  • गंगा का बहना
    नारी का सहना
    रीत पुरानी है...
    इतनी सी कहानी है।

    *श्रेष्ठ रचना के लिए बधाई*
    🙏

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

पर्यावरण दिवस, ईंधन बचाने की बातें और निजी कारों का ऐसा तमाम-जाम, दिलचस्प है न?

मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More

4 hours ago

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल, चीन से पाँच देशों की जासूसी, भारतीय भी सावधान रहें!

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम… Read More

1 day ago

‘शिक्षक’ ने अपने कौड़ी के ज्ञान से ‘पत्रकार’ को दो कौड़ी का साबित कर दिया, देखिए वीडियो!

देश की एक जानी-मानी ‘पत्रकार’ ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कह दिया कि… Read More

2 days ago

क्या हम भारतीयों को सार्वजनिक नियम-कायदे मानने की तमीज नहीं? अभी बहस तो यही है!

अभी एक-दो दिन से मीडिया-सोशल मीडिया में यह बहस चल रही है कि हम भारतीयों… Read More

3 days ago

अपने हिस्से का योगदान दीजिए, वरना लू के थपेड़ों से रोज 3,400 लोग मरने लग जाएँगे!

एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें भारत और उसके आस-पास के देशों में लगातार बढ़ती… Read More

4 days ago

इस लड़की ने दो लाख की नौकरी छोड़कर 60 हजार रुपए महीने में खुशी खरीदी है!

खुशी पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ज्यादातर लोग अमूमन बड़ी से बड़ी नौकरी… Read More

5 days ago