भक्तों की भक्ति-कीर्तन परम्परा : हनुमान की जय, हो जय जय, हनुमान की जय

टीम डायरी

भक्त हनुमान की जयन्ती पर भक्ति भाव के साथ आस्थावान भक्तों का नृत्य। इस वीडियो को देखने के बाद शायद किसी को इससे मतलब हो कि यह वीडियो कहाँ का है? किसने बनाया है? वगैरा। इस वीडियो के साथ ऐसी कोई जानकारी कहीं सहज उपलब्ध भी नहीं है। 

फिर भी बताना हमारा फर्ज है। तो गौर से देखिएगा। वीडियो में ऊपर ‘श्रीमूलराम’ लिखा हुआ है। अंग्रेजी में। इससे अन्दाज़ा लगाया जा सकता है कि यह वीडियो सम्भवत: आन्ध्रप्रदेश में कुरनूल जिले के देवारु में स्थित राघवेन्द्र स्वामी मठ का है। वहीं अतिप्रचीन ‘मूलरामसीता’ की मूर्तियाँ हैं। भव्य मन्दिर है। बताते है कि ये अतिप्राचीन मूर्तियाँ ‘चतुर्युगमूर्तियाँ’ भी कही जाती हैं। और इन्हें ‘मूलरामसीता’ का नाम महाराज दशरथ ने दिया था। राघवेन्द्र स्वामी मठ की वेबसाइट पर ऐसी जानकारी दर्ज हैं। इस मठ के कीर्तन परम्परा वाले स्वामी श्री जगन्नाथदास के कीर्तनों में इन मूर्तियों का पूरा इतिहास भी है, ऐसा कहा जाता है।

वैसे, कीर्तन का सन्दर्भ आया है तो यह भी याद किया जा सकता है कि महाराष्ट्र से आगे सुदूर दक्षिण की तरफ जैसे-जैसे बढ़ेंगे, सनातन की प्राचीन कीर्तन परम्परा आज भी जीवन्त दिखेगी। ठीक वैसे ही, जैसे इस वीडियो में रामभक्त हनुमान का कीर्तन करते भक्तों के बीच दिख रही है। भक्तिभाव से देखेंगे तो इसे सम्पूर्णता में आत्मसात् कर सकेंगे। फिर यह भी याद आएगा कि रामभक्त हनुमान खुद श्रीराम संकीर्तन से ही अपने प्रभु को स्मरण किया करते थे। उन्हें हमेशा ह्रदयस्थ रखा करते थे।…. जय जय श्री सीताराम।

भक्त हनुमान की जयन्ती पर हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएँ 

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Neelesh Dwivedi

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