मेरे जीवन का उद्देश्य क्या? मैंने सोचा तो मुझे मिला!

ज़ीनत ज़ैदी, दिल्ली

मैने खुद से सवाल किया कि मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है? मैं अपने जीवन में हासिल क्या करना चाहती हूँ? मेरे मुताबिक, ये ऐसे सवालात हैं जिनके ज़वाब हम सबके पास होने चाहिए, लेकिन मेरे पास कोई ज़वाब नहीं था। सिर्फ़ सवाल थे कि हम में से अक़्सरियत सफलता की परिभाषा को एक आलीशान घर, अच्छी जॉब, शानदार गाड़ी, वग़ैरा तक महदूद किया जा चुका है। हमारा उदेश्य सिर्फ़ पैसा कमाना है, जिससे हम अपनी ज़िन्दगी को आसान बना सकें। लेकिन ऐसे सिर्फ़ अपने लिए तो एक जानवर भी जीता है? इस तरह अगर हम सिर्फ अपना फ़ायदा देखें, तो हम में और किसी चार पैर वाले जानवर में कोई फ़र्क नहीं रह जाता? तो फिर?

आगे सोचते-सोचते मैंने पाया कि ईश्वर ने हमें इंसान की शक्ल में पैदा तो कर दिया लेकिन खुद को इंसान बनाना हमारी ज़िम्मेदारी है। एक ऐसा इंसान जो ख़ुदपरस्त न हो, ख़ुदापरस्त हो। जिसको दूसरे की मुश्किले भी नज़र आती हों। एक इंसान होने के नाते हमारा पहला उद्देश्य दूसरे इंसानों की मदद करना होना चाहिए। मदद से मतलब सिर्फ़ माली मदद नहीं हैं, बल्कि अपने से नीचे दर्ज़ वालों के साथ भी इंसानो जैसा सुलूक करना, उनके जीवन को आसान बनाने के लिए एक छोटा सा योगदान देना भी है l ये छोटे-छोटे काम हमें एक अच्छा इंसान बनाने की ताक़त रखते हैं। अगर हमारे पास संसाधन हैं, तो हम पर फ़र्ज़ है कि उन्हें सबके साथ मिलकर इस्तमाल करें।

बस, यहीं से मुझे अपनी ज़िन्दगी का उद्देश्य भी मिल गया। मेरे हिसाब से दूसरों का जीवन आसान बनाना ही अब मेरा उद्देश्य है। इससे मेरा कुछ नहीं जाएगा लेकिन उनकी ज़िन्दगी में कुछ पल के लिए ही सही, लेकिन खुशियाँ आ जाएँगीं। किसी को यह सुनने में थोड़ा सा अवास्तविक लग सकता है, लेकिन मैं यहाँ किसी इंसान को फ़र्श से अर्श तक पहुँचाने के ख़्वाब नहीं देख रही। बल्कि छोटी-छोटी इमदाद के ज़ारिये उनकी ज़िन्दगी को कुछ हद तक बेहतर बनने की बात कर रही हूँ। शुरुआत में यक़ीनन यह मुश्किल लगेगा, लेकिन यक़ीन मानिए, ये करके हमें खुशी मिलेगी। एक सन्तोष, जो उन लोगों की आँखों की चमक को देखकर हमारी आँखों में भी उतर आ जाएगा। हमारी एक छोटी सी शुरुआत उनके लिए एक बड़ी मदद साबित होगी।

जय हिन्द, जय भारत। 

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(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से है। दिल्ली के सूरजमलविहार स्कूल से 12वीं पढ़ाई करने के बाद अब उच्च शिक्षा के लिए क़दम बढ़ा रही हैं। इस उम्र में ही अपने लेखों के जरिए बड़े मसले उठाती है। अच्छी कविताएँ भी लिखती है। लिखने में उनकी स्वाभाविक रुचि है और लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं) 

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ज़ीनत के पिछले 10 लेख 

34- जो हम हैं, वही बने रहें, उसे ही पसन्द करने लगें… दुनिया के फ़रेब से ख़ुद बाहर आ जाएँगे!
33- क्या ज़मीन का एक टुकड़ा औलाद को माँ-बाप की जान लेने तक नीचे गिरा सकता है?
32 – इंसान इतना कमज़ोर कैसे हो रहा है कि इस आसानी से अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर ले?
31 – कल स्कूल आएगी क्या? ये सफर अब ख़त्म हुआ!
30 – कैंसर दिवस : आज सबसे बड़ा कैंसर ‘मोबाइल पर मुफ़्त इन्टरनेट’ है, इसका इलाज़ ढूँढ़ें!
29 – choose wisely, whatever we are doing will help us in our future or not
28 – चन्द पैसों के अपनों का खून… क्या ये शर्म से डूब मरने की बात नहीं है?
27 – भारत का 78वाँ स्वतंत्रता दिवस : क्या महिलाओं के लिए देश वाक़ई आज़ाद है?
26 – बेहतर है कि इनकी स्थिति में सुधार लाया जाए, एक कदम इनके लिए भी बढ़ाया जाए
25 – ‘जल पुरुष’ राजेन्द्र सिंह जैसे लोगों ने राह दिखाई, फिर भी जल-संकट से क्यूँ जूझते हम?

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