‘राजनीति की पिच’ पर असफल अजहरुद्दीन को ‘मंत्री पद का इनाम’ क्यों दे रही कांग्रेस?

टीम डायरी

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को कांग्रेस पार्टी ‘मंत्री पद का इनाम’ दे सकती है। ऐसी सूचनाएँ हैं कि उन्हें तेलंगाना की रेवन्त रेड्‌डी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है। वे गुरुवार, 30 अक्टूबर या शुक्रवार, 31 अक्टूबर को मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इण्डियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान तेलंगाना के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने बताया कि अजहरुद्दीन को “मंत्री बनाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री रेवन्त रेड्‌डी पर गाँधी परिवार का दबाव है। इसी कारण यह निर्णय लिया गया है।” 

दिलचस्प बात है कि अजहरुद्दीन ‘राजनीति की पिच’ पर अब तक असफल ही साबित हुए हैं। उन्हें कांगेस ने 2009 और 2014 में लोकसभा के चुनाव में उतारा। पहली बार, 2009 में, तो वह उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीते। लेकिन 2014 में जब राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर से उन्हें चुनाव लड़ाया गया तो वह हार गए। बावजूद इसके उन्हें हैदराबाद के जुबली हिल्स क्षेत्र से 2023 में विधानसभा का चुनाव लड़ाया गया। हालाँकि वहाँ से भी उन्हें पराजय ही मिली, जबकि वह हैदराबाद के रहने वाले हैं।

क्रिकेट में भी अजहरुद्दीन की छवि कोई साफ-सुथरी नहीं रही। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहते हुए उन पर मैच फिक्सिंग (सट्टेबाजों के प्रभाव में आकर खेल में जीत-हार के पहले लिए जा चुके निर्णय के हिसाब से खेलना और उसके लिए रिश्वत की मोटी रकम लेना) के आरोप लगे थे। दोषी पाए जाने पर उन्हें क्रिकेट में कोई भी भूमिका हाथ में लेने के लिए प्रतिबन्धित तक किया गया था। 

इस सबके बाद भी कांग्रेस पार्टी, खासकर गाँधी परिवार, उन पर मेहरबान है। क्यों? इसका कारण है, उनका ‘चर्चित मुस्लिम शख्सियत’ होना। अजहरुद्दीन ने क्रिकेट और राजनीति में नाम कमाया हो या वह बदनाम रहे हों, वह सफल रहे हों या असफल। लेकिन एक बात तय है कि वह आज भी चर्चित शख्सियतों में शुमार किए जाते हैं। उनके प्रशंसकों का एक वर्ग भी मौजूद है। इसी कारण कांग्रेस पार्टी का ‘सर्वोच्च परिवार’ उन पर लगातार दाँव खेलता जा रहा है। इस परिवार को लगता है कि अजहरुद्दीन तेलंगाना में मुस्लिम समुदाय को पार्टी की तरफ खींचने का माध्यम बन सकते हैं। इसलिए उन्हें आगे रखना जरूरी है। 

इसके अलावा जिस जुबली हिल्स विधानसभा क्षेत्र से अजहरुद्दीन 2023 में चुनाव हार चुके हैं, वहाँ इसी 11 नवम्बर को उपचुनाव भी है। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायक मगंति गोपीनाथ के निधन के कारण यहाँ उपचुनाव कराना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में करीब चार लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग सवा लाख मुस्लिम हैं। इसलिए भी अजहरुद्दीन को जल्दबाजी में ‘मंत्री पद का इनाम’ देकर आगे किया जा रहा है। हालाँकि सवाल यहाँ भी है कि जिस शख्स को इसी क्षेत्र के मतदाताओं ने सीधे चुनाव प्रत्याशी के तौर पर नकार दिया, क्या उसे मंत्री बनाए जाने से खुश होकर वे किसी और को वोट देकर जिताएँगे? 

जवाब 14 नवम्बर को उपचुनाव के नतीजे के साथ मिल जाएगा। अलबत्ता, अजहरुद्दीन की सेहत पर इस नतीजे से भी कोई फर्क पड़ेगा, इसकी सम्भावना कम ही है।     

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Neelesh Dwivedi

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