मेरे प्यारे गाँव तुमने मुझे हाल ही में प्रेम में भीगी और आत्मा को झंकृत करने वाली पाती लिखी। मैं तुम्हारा इतना लाड़-प्यार पाकर अभिभूत…
View More अपने गाँव को गाँव के प्रेमी का जवाब : मेरे प्यारे गाँव तुम मेरी रूह में धंसी हुई कील हो…!!Author: From Visitor
यदि जीव-जन्तु बोल सकते तो ‘मानवरूपी दानवों’ के विनाश की प्रार्थना करते!!
काश, मानव जाति का विकास न हुआ होता, तो कितना ही अच्छा होता। हम शिकार करते, खाना खाते, यायावरी करते और सो जाते। पूरा जीवन…
View More यदि जीव-जन्तु बोल सकते तो ‘मानवरूपी दानवों’ के विनाश की प्रार्थना करते!!“अपने बच्चों को इतना मत पढ़ाओ कि वे आपको अकेला छोड़ दें!”
“अपने बच्चों को इतना मत पढ़ाओ कि वे आपको अकेला छोड़ दें!” अभी इन्दौर में जब मैं एक अन्तिम संस्कार में गया, तो वहाँ मुझे एक…
View More “अपने बच्चों को इतना मत पढ़ाओ कि वे आपको अकेला छोड़ दें!”क्रिकेट में जुआ, हमने नहीं छुआ…क्योंकि हमारे माता-पिता ने हमारी परवरिश अच्छे से की!
क्रिकेट में जुआ-सट्टा कोई नई बात नहीं है। अब से 30 साल पहले भी यह सब होता था। आज भी हो रहा है। मुझे याद…
View More क्रिकेट में जुआ, हमने नहीं छुआ…क्योंकि हमारे माता-पिता ने हमारी परवरिश अच्छे से की!गाँव की प्रेम पाती…,गाँव के प्रेमियों के नाम : चले भी आओ कि मैं तुम्हारी छुअन चाहता हूँ!
जी हाँ मैं गाँव हूँ, जो धड़कता रहता है हर उस शख्स के अन्दर जिसने मुझे अपनी आत्मा में ओढ़ रखा है। क्योंकि किसी कोढ़ी…
View More गाँव की प्रेम पाती…,गाँव के प्रेमियों के नाम : चले भी आओ कि मैं तुम्हारी छुअन चाहता हूँ!जयन्ती : डॉक्टर हेडगेवार की कही हुई कौन सी बात आज सही साबित हो रही है?
अभी 30 मार्च को हिन्दी महीने की तिथि के हिसाब से वर्ष प्रतिपदा थी। अर्थात् नव वर्ष की शुरुआत, साल का पहला दिन। ऐसे ही…
View More जयन्ती : डॉक्टर हेडगेवार की कही हुई कौन सी बात आज सही साबित हो रही है?अख़बार के शीर्षक में ‘चैत्र’ नवरात्र को ‘शारदीय’ नवरात्र लिखा गया हो तो इसे क्या कहेंगे?
आज चैत्र नवरात्र का प्रथम दिवस। स्वतंत्रता पश्चात् ऐसे कई नवरात्र आए भगवती देवी की कृपा से हम भारतीय संस्कृति के पर्वों को बिना भय…
View More अख़बार के शीर्षक में ‘चैत्र’ नवरात्र को ‘शारदीय’ नवरात्र लिखा गया हो तो इसे क्या कहेंगे?क्या ज़मीन का एक टुकड़ा औलाद को माँ-बाप की जान लेने तक नीचे गिरा सकता है?
भारत अपनी संस्कृति, मिलनसारता और अपनत्त्व के लिए जाना जाता है। इसलिए क्योंकि शायद बचपन से ही भारतीयों को रिश्ते निभाना सिखाया जाता है। वे…
View More क्या ज़मीन का एक टुकड़ा औलाद को माँ-बाप की जान लेने तक नीचे गिरा सकता है?आधुनिक विज्ञान तात्कालिक फायदों के साथ विकृतियाँ भी देता है, पढ़िए कैसे!
पूर्व के दो भागों में हमें सृष्टि-विकास और स्वास्थ्य की दृष्टि से जीवों के सूक्ष्मजैविक तंत्र के स्तर पर पारस्परिक विनिमय के महत्त्व का अवलोकन…
View More आधुनिक विज्ञान तात्कालिक फायदों के साथ विकृतियाँ भी देता है, पढ़िए कैसे!मेरी इतिहास की किताबों में ‘छावा’ (सम्भाजी महाराज) से जुड़ी कोई जानकारी क्यों नहीं थी?
हमारी शिक्षा कितनी खोखली और तथ्यात्मक रूप से तोड़ी-मरोड़ी हुई है, इसका एहसास मुझे एक बार फिर बीती शाम को तब हुआ जब मैंने ‘छावा’…
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