यहाँ तस्वीर में दिखने वाली बच्ची का नाम प्राची निगम है। आज, शनिवार 20 अप्रैल को उत्तर प्रदेश बोर्ड की 10वीं की परीक्षा के घोषित…
View More योग्यतम रही इस बच्ची की ज़रा सी असुन्दरता क्या इसका बड़ा दोष है, जो…?Author: From Visitor
आपका रंग जैसा भी हो, काम का रंग पक्का होना चाहिए
मैं मम्मी से मिलने गई थी। नवरात्रि में अपनी माँ से मिलना ज़रूरी होता है। चलते वक़्त वो कहती हैं, “तुम्हारा रंग दबता जा रहा…
View More आपका रंग जैसा भी हो, काम का रंग पक्का होना चाहिए‘संस्कृत की संस्कृति’ : ऋषि कौन, वेद क्या और मंत्र क्या?
आचार्य कौत्स वेद मंत्रों को निरर्थक कहते हैं। लेकिन कौत्स के प्रश्नों का उत्तर देते हुए आचार्य यास्क कहते हैं- मंत्र कोई सामान्य कथन नहीं…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : ऋषि कौन, वेद क्या और मंत्र क्या?हम कैसे इतने अधर्मी और असंवेदनशील बना दिए गए?
घर के सामने रहने वाली पांडे ताईजी ने रोज की तरह सुबह उठकर घर के कोने पर आकर एक डलिया रख दी। कुछ देर बाद…
View More हम कैसे इतने अधर्मी और असंवेदनशील बना दिए गए?छोटे कारोबारी कैसे स्थापित कारोबारियों को टक्कर दे रहे हैं, पढ़िए अस्ल कहानी!
पिछले महीने मैं पुणे गया हुआ था। अपने कारोबार के सिलसिले में मुझे वहाँ किसी से मिलना था। सुबह 10 बजे बैठक शुरू होने वाली…
View More छोटे कारोबारी कैसे स्थापित कारोबारियों को टक्कर दे रहे हैं, पढ़िए अस्ल कहानी!ऑनलाइन दुनिया में भिखमंगों-दानियों का खेल और ग़ैरहाज़िर सरगना
जीव में लोभ प्राकृत है। हम सब चाहते हैं कि हमें कोई कुछ दे दे। किसी से हमें कुछ मिल जाए। जीवों के आपसी सम्बन्ध…
View More ऑनलाइन दुनिया में भिखमंगों-दानियों का खेल और ग़ैरहाज़िर सरगनासाफ़-सफ़ाई सिर्फ सरकारों की ज़िम्मेदारी नहीं, देश के हर नागरिक की है
सफ़ाई हमारी ज़िन्दगी का वह अहम हिस्सा है, जो हमारे व्यक्तित्त्व की पहचान भी कराता है। एक सफ़ाई पसन्द व्यक्ति ही अस्ल में ज़िम्मेदार शख़्स…
View More साफ़-सफ़ाई सिर्फ सरकारों की ज़िम्मेदारी नहीं, देश के हर नागरिक की है‘संस्कृत की संस्कृति’ : बहस क्या है… वाद या वितण्डा? जानने के लिए पढ़िए
प्राय: हम देखते हैं कि भारतीय संस्कृति के प्रतीकों और मान्यताओं को ही नहीं अपितु संस्कृति से जुड़े छोटे-छोटे विचारों, कथनों, वाक्यों और यहाँ तक…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : बहस क्या है… वाद या वितण्डा? जानने के लिए पढ़िएगुढी पाडवा : धर्ममय प्राणों के नवोन्मेष का काल
निसर्ग में अनुस्यूत परमतत्त्व जिस ऋतु-पर्यावरण, आचार-विचार, आहार-विहार चक्र से मानवता में प्रवाहित हाेता है उसके विज्ञान के ज्ञान को भी धर्म कहते हैं। हमारे…
View More गुढी पाडवा : धर्ममय प्राणों के नवोन्मेष का कालख़ुद के अंदर कहीं न कहीं, तुम अब भी मौजूद हो
मैं मिल जाती हूँ ख़ुद से जब हवा मुझे छूकर गुज़रती है वो याद दिलाती है मुझे बार बार कि मैं मौजूद हूँ सूखे पत्तों…
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