प्रिय मुनिया, मेरी गिलहरी, तुम आज पूरे दो साल की हो गई हो। तुम्हें पिछला पत्र तुम्हारे पहले जन्मदिन पर एक साल पहले 27 जनवरी…
View More बेटी के नाम छठवीं पाती : तुम्हारी मुस्कान हर दर्द भुला देती हैAuthor: From Visitor
ऐसे बहुत से बच्चों की टीचर उन्हें ढूँढ रहीं होगीं
कल माघ मेले में इनसे मिलना हुआ l मसाला चाय बेच रहे थे और हमारे पीछे हो लिए l हमारी दुनिया तो ऐसे ही बच्चों…
View More ऐसे बहुत से बच्चों की टीचर उन्हें ढूँढ रहीं होगीं…लगी निभाने की सौगंध नहीं क्या तुम्हारी है?
तेरी नज़र जब मुझे अपने से ज़ुदा करती है मेरी नज़र तुझे भूलने की ख़ता करती है न देखा, न समझा, न सुना ही है…
View More …लगी निभाने की सौगंध नहीं क्या तुम्हारी है?ये कैसा हिन्दी अनुवाद, जहाँ हिन्दी ही ढूँढनी पड़ जाए?
ये दिल्ली के मशहूर ‘मैक्स’ अस्पताल में लगे सूचना पटल हैं। इन पर लिखी सूचनाओं पर ग़ौर कीजिए। कहने के लिए तो सूचनाएँ हिन्दी और…
View More ये कैसा हिन्दी अनुवाद, जहाँ हिन्दी ही ढूँढनी पड़ जाए?तेज विकास के दौर में कृषि की अनदेखी हमें कहाँ ले जा रही है?
देश की अर्थव्यवस्था विकास की एक अभूतपूर्व स्थिति से गुजर रही है। कमजोरी से जूझती बीमार विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भारत और चीन की विकास…
View More तेज विकास के दौर में कृषि की अनदेखी हमें कहाँ ले जा रही है?‘संस्कृत की संस्कृति’ : संस्कृत व्याकरण में ‘गणपाठ’ क्या है?
सार्थक नाम रखने हेतु संस्कृत भाषा का ज्ञान हमारे लिए सहयोगी होता है। इसी तरह, संस्कृत जानने हेतु, शब्दों के सार्थक प्रयोग हेतु संस्कृत व्याकरण…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : संस्कृत व्याकरण में ‘गणपाठ’ क्या है?‘संस्कृत की संस्कृति’ : बच्चे का नाम कैसा हो- सुन्दर और सार्थक या नया और निरर्थक?
हमने पिछली बार यादृच्छिक शब्दों के प्रयोग पर और धातु से उत्पन्न शब्दों के बारे में चर्चा की थी। यादृच्छिक शब्दों के प्रयोग से एक…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : बच्चे का नाम कैसा हो- सुन्दर और सार्थक या नया और निरर्थक?आज विश्व हिन्दी दिवस है… और ये विश्व ‘विधालय’ अनुदान आयोग है!
आज ‘विश्व हिन्दी दिवस’ है। दुनिया भर के हिन्दी विशेषज्ञ, मीडिया और सोशल मीडिया वग़ैरा के मंचों पर भर-भर के ज्ञान दिया जा रहा है।…
View More आज विश्व हिन्दी दिवस है… और ये विश्व ‘विधालय’ अनुदान आयोग है!बकासुर से जीते पांडव, एकचक्रा के ‘लोकतंत्र’ से हारे
आज बरसों बाद एकचक्रा नगरी के रहवासियों ने राहत की साँस ली थी। अज्ञातवास के दौरान पांडवों को शरण देने वाले ब्राह्मण परिवार की सुरक्षा…
View More बकासुर से जीते पांडव, एकचक्रा के ‘लोकतंत्र’ से हारेजानवरों के भी हुक़ूक हैं, उनका ख़्याल रखिए
आज ज़्यादातर लोग नौकरी या किसी और सिलसिले में अपने घर और अपनों से दूर दूसरे शहरों में रहते हैं। इसी कारण अकेलेपन से पीछा…
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