भूपेन हजारिका के एक गाने की पंक्तियाँ याद आ रही हैं… “निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ” . नारी और नदी,…
View More नि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!Author: Neelesh Dwivedi
विलंब से हुआ न्याय अन्याय है तात्
…चलिए केंद्र सरकार ने सबक तो लिया। भले ही 25 साल लग गए। जल्दी भी क्या थी? कौन कहां भागा जा रहा था? हादसा हो…
View More विलंब से हुआ न्याय अन्याय है तात्अपनी स्वदेशी साइकिल… नहीं, बैटरी वाली स्वदेशी साइकिल
दिल्ली की एक नई-नवेली कम्पनी है, ‘ध्रुव विद्युत’। इसके संस्थापक गुरुसौरभ ने एक बढ़िया नवाचार किया है। उन्होंने हवाई जहाजों को बनाने में इस्तेमाल की…
View More अपनी स्वदेशी साइकिल… नहीं, बैटरी वाली स्वदेशी साइकिलजाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी
वेदों में देवता से कई प्रकार के भाव लिए गए हैं। साधारणतः वेदमंत्रों के जितने विषय हैं, वे देवता कहलाते हैं। नैरुक्तकार यास्क ने देवता…
View More जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसीमैं अपने अँधेरों के संग बदस्तूर चल रहा हूँ
जीवन में मृत्यु एक शाश्वत और अनिवार्य सच्चाई है। इसकी अनिवार्यता अब तो इतनी हो चुकी है कि रोज ही इस किस्म की ख़बर सुनने…
View More मैं अपने अँधेरों के संग बदस्तूर चल रहा हूँयूनियन कार्बाइड इंडिया उर्फ एवर रेडी इंडिया!
भोपाल में अब मुआवजे की चर्चा ही ज्यादा है। यही सवाल हवाओं में तैर रहे हैं ‘कितनों को कितना मिलेगा, कितना मिल चुका है, किसका…
View More यूनियन कार्बाइड इंडिया उर्फ एवर रेडी इंडिया!जब कोई ‘लीडर’ से ‘लैडर’ हो जाए…
आज यूँ ही अपने छोटे शहर के कुछ वाक़ये याद हो आए। ये ऐसे वाक़ये हैं, तमाम लोगों के साथ गुजरे होंगे, जो ऐसे शहरों…
View More जब कोई ‘लीडर’ से ‘लैडर’ हो जाए…जो दिख रहा हो वास्तव में उतना ही सच नहीं होता
हमने पिछली कड़ी में देखा था कि कैसे एक वस्तु को अलग-अलग दृष्टि से देखने वाला व्यक्ति अलग व्याख्या करता है। प्रत्येक समग्रता से वस्तु…
View More जो दिख रहा हो वास्तव में उतना ही सच नहीं होताआओ, कोई इस तन के तम्बूरे में तार जोड़ दो!
आज फिर अमावस है और मैं गर्म ऊँची चट्टानों पर खड़ा तेज सूरज की रोशनी में जीवन का वृन्दगान सुन रहा हूँ। एक छोर पर…
View More आओ, कोई इस तन के तम्बूरे में तार जोड़ दो!नवसंवत् का आरंभ विक्रमादित्य ने खगोलीय घटना के आधार पर किया था
हमारा ‘विक्रम संवत्’ ईसवी संवत् से 57 वर्ष पुराना है। महराज विक्रमादित्य ने शकों को हराकर नहीं अपितु खगोलीय घटना के आधार पर विक्रम संवत्…
View More नवसंवत् का आरंभ विक्रमादित्य ने खगोलीय घटना के आधार पर किया था