सिद्दी के घेरे में खड़ीं तोपें पन्हाला पर आग उगल रहीं थीं। लेकिन इससे पन्हाला को कोई क्षति नहीं पहुँची। सिद्दी ने पहचान लिया कि…
View More शिवाजी महाराज : शिवाजी ने सिद्दी जौहर से ‘बिना शर्त शरणागति’ क्यों माँगी?Author: Neelesh Dwivedi
होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी…
आज रंग-पंचमी है। होली के उत्सव का चरम। इस मौके पर एक खूबसूरत कवित्त की कुछ लाइनें देखिए… होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी। …
View More होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी…शिवाजी महाराज : जब 60 साल की जिजाऊ साहब खुद मोर्चे पर निकलने काे तैयार हो गईं
“पन्हालगढ़ स्वराज्य में आ गया। पन्हाला जैसा प्रचंड और बलाढ्य गढ़ मिलने से स्वराज्य की ताकत बढ़ गई। पन्हाला से सटकर एक और छोटा सा…
View More शिवाजी महाराज : जब 60 साल की जिजाऊ साहब खुद मोर्चे पर निकलने काे तैयार हो गईंदेखो न, कैसे मैंने होली मनाई….
सुबह उठा तो सबसे पहले जिस चीज में दिमाग भिड़ाना पड़ा ,वह था आँखों में चुपरा गया काजल। रात में होली जलाकर आने के बाद…
View More देखो न, कैसे मैंने होली मनाई….शिवाजी महाराज : खान का कटा हुआ सिर देखकर आऊसाहब का कलेजा ठंडा हुआ
अफजल खान का सिर महाराज ने राजगढ़ को रवाना किया। फतह की खबरें आऊसाहब के पास पहुँच गई। खबरें खुशियों के रंग बिखेरतीं आऊसाहब के…
View More शिवाजी महाराज : खान का कटा हुआ सिर देखकर आऊसाहब का कलेजा ठंडा हुआधन्य है यह त्योहार, जिसमें सब रंग बदलते हैं… जय होली, जियो होली
लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन। रोज से लगभग दोगुनी भीड़। हर एक पैर जल्दी-जल्दी अपने गन्तव्य की ओर बढ़ रहा था। टिकट के लिए लगी…
View More धन्य है यह त्योहार, जिसमें सब रंग बदलते हैं… जय होली, जियो होलीशिवाजी महाराज : लड़ाइयाँ ऐसे ही निष्ठावान् सरदारों, सिपाहियों के बलबूते पर जीती जाती हैं
खान जब बीजापुर से चला था तो विदाई से पहले बादशाह अली आदिल शाह और बड़ी बेगम ने साफ शब्दों में कह दिया था, “उस…
View More शिवाजी महाराज : लड़ाइयाँ ऐसे ही निष्ठावान् सरदारों, सिपाहियों के बलबूते पर जीती जाती हैं“फूलै फूलै चुन लिए, काल्ह हमारी बार…” सतीश कौशिक जी… सादर नमन्
‘वो सात दिन’ में अपना काम करके अनन्त यात्रा पर निकल ही गया बन्दा आख़िर। एक दिन हमें भी यह सब छोड़कर जाना ही है।…
View More “फूलै फूलै चुन लिए, काल्ह हमारी बार…” सतीश कौशिक जी… सादर नमन्शिवाजी महाराज : शिवाजी राजे ने जब अफजल खान के खून से होली खेली!
शिवाजी राजे ने अफजल खान से लोहा लेने की ठान ली। इसी अफजल खान ने बेड़ियाँ डालकर उनके पिता की बारात निकाली थी। इसी ने…
View More शिवाजी महाराज : शिवाजी राजे ने जब अफजल खान के खून से होली खेली!रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे….
‘अपनी डिजिटल डायरी’ की ओर से सभी पाठकों, दर्शकों, श्रोताओं को होली की अनन्त शुभकामनाएँ। इन शुभकामनाओं को और रंगीन किया है, भोपाल की वैष्णवी…
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