कोंकण में शिवाजी राजे ने तहलका मचा दिया था। बीजापुर दरबार में लगातार वही खबरें आ रही थीं। शाही दौलत को जबर्दस्त खतरा पैदा हो…
View More शिवाजी महाराज : शाही तख्त के सामने बीड़ा रखा था, दरबार चित्र की भाँति निस्तब्ध थाAuthor: Neelesh Dwivedi
निर्गुण की होरी : गगन मंडल अरूझाई, नित फाग मची है…
होली मतलब रंग। रंग है तो रंगने वाला होगा ही। फिर अगर कोई आए और सीधे रंगकर चला जाए तो भला होली कैसी? बिना चुहल…
View More निर्गुण की होरी : गगन मंडल अरूझाई, नित फाग मची है…शिवाजी ‘महाराज’ : राजे को तलवार बहुत पसन्द आई, आगे इसी को उन्होंने नाम दिया ‘भवानी’
शिवाजी राजे का ध्यान अब कोंकण किनारे पर लगा हुआ था। उन्हें साफ नजर आ रहा था कि पश्चिम का यह सिन्धु सागर स्वराज्य-सत्ता के…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : राजे को तलवार बहुत पसन्द आई, आगे इसी को उन्होंने नाम दिया ‘भवानी’अवध में होरी : माता सीता के लिए मना करना सम्भव न था, वे तथास्तु बोलीं और मूर्छित हो गईं
अवध में उत्सव की तैयारी हो रही थी। होली को अब बस केवल तीन दिन ही शेष बचे थे। राजा दशरथ जी के महल में…
View More अवध में होरी : माता सीता के लिए मना करना सम्भव न था, वे तथास्तु बोलीं और मूर्छित हो गईंशिवाजी महाराज : कमजोर को कोई नहीं पूछता, सो उठो! शक्ति की उपासना करो
पुरन्दर गढ़ के किलेदार नीलकण्ठराव सरनाईक का देहान्त हुआ (सन् 1654 का तीसरा हफ्ता)। पाँच महीने बाद शिवाजी ने पुरन्दर पर कब्जा कर लिया। नेताजी…
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पूरे बरसाने गाँव में रंग बरस रहा था। लेकिन गोपियों की दृष्टि नन्दगाँव वाली पगडंडी की ओर लगी थी। कृष्ण की प्रतीक्षा में गोपियों की…
View More जो रस बरस रहा बरसाने, सो रस तीन लोक में नशिवाजी महाराज : बोलो “क्या चाहिए तुम्हें? तुम्हारा सुहाग या स्वराज्य?
शहाजी राजे को छल से कैद किया गया। चोर-डाकुओं की तरह बेड़ियाँ डालकर बीजापुर भेजा गया। लिवा ले जाने का काम अफजल खान के हिस्से…
View More शिवाजी महाराज : बोलो “क्या चाहिए तुम्हें? तुम्हारा सुहाग या स्वराज्य?दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे….
सोशल मीडिया और फोन पर सम्पर्क ठीक है, लेकिन सीखने-समझने के लिए आमने-सामने की मुलाकात और बातचीत करना बहुत जरूरी है। कल शाम को ऐसी…
View More दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे….भूत, पिशाच, बटोरी…. दिगम्बर खेलें मसाने में होरी
होलिका दहन को अभी चार दिन शेष थे। किन्तु फागुन की फागुआहट ने सबको सराबोर कर लिया था। काशी तो कुछ ज्यादा ही उत्सवी लहक…
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शिवाजी राजे के कारनामों की खबरें बीजापुर पहुँच गई। यह नेक काम किया सुभानमंगल किले के किलेदार मियाँ रहीम अहमद ने। बगावत की खबरें सुनकर…
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