JAIN-DHARM

जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी

वेदों में देवता से कई प्रकार के भाव लिए गए हैं। साधारणतः वेदमंत्रों के जितने विषय हैं, वे देवता कहलाते हैं। नैरुक्तकार यास्क ने देवता…

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life-and-death

मैं अपने अँधेरों के संग बदस्तूर चल रहा हूँ

जीवन में मृत्यु एक शाश्वत और अनिवार्य सच्चाई है। इसकी अनिवार्यता अब तो इतनी हो चुकी है कि रोज ही इस किस्म की ख़बर सुनने…

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ladder

जब कोई ‘लीडर’ से ‘लैडर’ हो जाए…

आज यूँ ही अपने छोटे शहर के कुछ वाक़ये याद हो आए। ये ऐसे वाक़ये हैं, तमाम लोगों के साथ गुजरे होंगे, जो ऐसे शहरों…

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Elephant

जो दिख रहा हो वास्तव में उतना ही सच नहीं होता

हमने पिछली कड़ी में देखा था कि कैसे एक वस्तु को अलग-अलग दृष्टि से देखने वाला व्यक्ति अलग व्याख्या करता है। प्रत्येक समग्रता से वस्तु…

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Amavasya

आओ, कोई इस तन के तम्बूरे में तार जोड़ दो!

आज फिर अमावस है और मैं गर्म ऊँची चट्टानों पर खड़ा तेज सूरज की रोशनी में जीवन का वृन्दगान सुन रहा हूँ। एक छोर पर…

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Mumbai Airport

यहाँ बिल्कुल अलग समाज दिखाई देता है, सामान्यतया तो ऐसे लोग दिखाई नहीं देते!

अभी कुछ रोज पहले मुंबई हवाईअड्डे पर था। उड़ान में देरी हो गई। 45 मिनट की। बिना किसी पूर्व सूचना के। यहाँ भीड़ थी। कुर्सियाँ…

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Blind and Elephant

सिक्के के कितने पहलू होते हैं.. एक, दो या ज्यादा.. जवाब यहाँ है!

मानव के मन में विचारों को श्रृंखला जन्म लेती है। और विविध विचारों के जन्म का कारण उसका परिवेश होता है। हम जैसे परिवेश में…

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Live your life, life

सब भूलकर अपनी गठरी खोलो और जी लो, बस

जीवन के उत्तरार्ध में हम सब का मूल्याँकन रुपए-पैसे से होता है। कितनी पेंशन बनी, कितनी बचत थी, फंड कितना मिला, बच्चों को सैटल कर…

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Father Daughter

बेटी के नाम चौथी पाती : तुम्हारा होना जीवन की सबसे ख़ूबसूरत रंगत है

प्रिय मुनिया, मेरी जान, तुम्हारे जन्मोत्सव के बाद मुझे तुम्हें यह चौथा पत्र लिखने में तनिक विलम्ब हो गया है। मैं तुम्हें यह पत्र तुम्हारे…

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laughing Buddha

हम सब कुछ पाने के लिए ही करते हैं पर सुख क्यों नहीं मिलता?

एक सेठ जी को एक बार यह जानने की चिन्ता हुई कि मेरी सम्पत्ति कितनी है? इसका उपभोग और कितने दिन किया जा सकता है? सो, तत्काल उन्होंने अपने अकाउंटेंट को बुलवा भेजा और उससे जानना चाहा। बदले में लेखाधिकारी ने कुछ समय माँगा। कुछ दिनों बाद लेखाधिकारी सेठ जी को बताता है कि यह सम्पत्ति आपकी अगली आठ पीढ़ियों तक के लिए पर्याप्त है। फिर क्या था सेठ जी चिन्ता में डूब गए….

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