एक बार बुद्ध के पास मौलुंकपुत्त नामक व्यक्ति आया। उसने बुद्ध से पूछा कि क्या वाक़ई ईश्वर है? बुद्ध ने ज़वाब दिया, “क्या वाक़ई में…
View More बुद्ध कुछ प्रश्नों पर मौन हो जाते हैं, मुस्कुरा उठते हैं, क्यों?Tag: अपना पन्ना
पूर्णता ही ख़ोख़लेपन का सर्वोच्च और अनन्तिम सत्य है!
सुनता है गुरु ज्ञानी, गगन में आवाज़ हो रही झीनी-झीनी। —— अड़सठ घाट भीतर हैं, कहाँ जाना है? न गंगा, न यमुना, सुमिरन कर ले…
View More पूर्णता ही ख़ोख़लेपन का सर्वोच्च और अनन्तिम सत्य है!महात्मा बुद्ध आत्मा को क्यों नकार देते हैं?
किन्हीं सेठ जी को अपने धन पर बहुत गर्व था। वे जब किसी को धन से मदद करते, तो सब जगह उसका बख़ान किया करते…
View More महात्मा बुद्ध आत्मा को क्यों नकार देते हैं?अधूरापन जीवन है और पूर्णता एक कल्पना!
हम सब अधूरे हैं। आधे-अधूरे काम करते हैं। अधूरेपन में जीते हैं। अधूरे रहकर ही जीवन समाप्त करते हैं। अपने अधूरेपन के कारण ही जीवन…
View More अधूरापन जीवन है और पूर्णता एक कल्पना!कृष्ण और बुद्ध के बीच मौलिक अन्तर क्या हैं?
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर कृष्ण के विविध रूपों की लोगों ने अपने-अपने मतानुसार आराधना की। प्राय: श्रीक़ष्ण का बाल रूप और उनके उस स्वरूप की लीलाएँ हर व्यक्ति…
View More कृष्ण और बुद्ध के बीच मौलिक अन्तर क्या हैं?…पर हे कृष्ण! मैं हूँ तुम्हारे साथ, जीने और संग मरने के लिए भी!
कृष्ण एक अभिशप्त मानव, निर्वासित देवता…। सुनने में अटपटा लगा न, अस्वीकार्य भी? ऐसा ही होता है। सच अक़्सर अस्वीकार्य और कड़वा सा लगता है। इसीलिए उस पर महिमामंडन…
View More …पर हे कृष्ण! मैं हूँ तुम्हारे साथ, जीने और संग मरने के लिए भी!हम जितने वाचाल, बहिर्मुखी होते हैं, अन्दर से उतने एकाकी, दुखी भी
जीवन में जब होने, खोने और पाने के मायने जल्दी समझ आ जाते हैं, तो समझदार व्यक्ति ही आगे जाने या ख़ुद को ख़त्म करने…
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आतंक के शिकंजे में दबोचे जा चुके अफ़ग़ानिस्तान से आज, 24 अगस्त 2021 को गुरु ग्रन्थ साहिब की तीन प्रतियाँ भारत आई हैं। गुरु ग्रन्थ…
View More बुद्ध की बताई ‘सम्यक समाधि’, ‘गुरुओं’ की तरह, अर्जुन के जैसीअपने पिंजरे हमें ख़ुद ही तोड़ने होंगे
यूँ तो रोज ही छुट्टी है, लेकिन इन दिनों रविवार का अपना मज़ा है। लिहाज़ा उस रोज़ सोचा कि कुछ बटन टूट गए हैं, उन्हें…
View More अपने पिंजरे हमें ख़ुद ही तोड़ने होंगेसम्यक स्मृति; कि हम मोक्ष के पथ पर बढ़ें, तालिबान नहीं, कृष्ण हो सकें
यादें बड़ी कमाल की चीजें होती हैं। हम अपनी यादों में पूरे संसार को समेटे रहते हैं। ये यादें अच्छी, बुरी, दुख देने वाली और…
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