जीव में लोभ प्राकृत है। हम सब चाहते हैं कि हमें कोई कुछ दे दे। किसी से हमें कुछ मिल जाए। जीवों के आपसी सम्बन्ध…
View More ऑनलाइन दुनिया में भिखमंगों-दानियों का खेल और ग़ैरहाज़िर सरगनाTag: सरोकार
गुढी पाडवा : धर्ममय प्राणों के नवोन्मेष का काल
निसर्ग में अनुस्यूत परमतत्त्व जिस ऋतु-पर्यावरण, आचार-विचार, आहार-विहार चक्र से मानवता में प्रवाहित हाेता है उसके विज्ञान के ज्ञान को भी धर्म कहते हैं। हमारे…
View More गुढी पाडवा : धर्ममय प्राणों के नवोन्मेष का कालकवियों की चुटकुलेबाज़ी के बीच : यह अँधेरे की सड़क उस भोर (मनु वैशाली) तक जाती तो है…
ये दौर सोशल मीडिया का है। इसलिए हर कोई इन सोशल मीडिया के माध्यमों से मशहूर होना चाहता है। और अब तो मशहूरियत के स्तर…
View More कवियों की चुटकुलेबाज़ी के बीच : यह अँधेरे की सड़क उस भोर (मनु वैशाली) तक जाती तो है…अब आईआईटी वालों को भी नौकरी नहीं, अगर ये सच है तो चिन्ताजनक है!
देश में जारी चुनावी चकल्लस के बीच आई एक ख़बर ने समाज के बड़े वर्ग में चिन्ता पैदा कर दी है। हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार ने…
View More अब आईआईटी वालों को भी नौकरी नहीं, अगर ये सच है तो चिन्ताजनक है!‘मायावी अम्बा और शैतान’ : अनुपयोगी, असहाय, ऐसी जिंदगी भी किस काम की?
# भविष्यवाणियाँ # उस जादूगरनी से मिलना उसकी अटल नियति थी। एक भविष्यवाणी। भले उसके भीतर हम कहीं छिपे थे लेकिन उस जादूगरनी के सम्मोहन…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : अनुपयोगी, असहाय, ऐसी जिंदगी भी किस काम की?‘संस्कृत की संस्कृति’ : “अनर्थका: हि मंत्रा:” यानि मंत्र अनर्थक हैं, ये किसने कहा और क्यों?
आज हम सभी चीजों, बातों और विचारों को वैज्ञानिक कसौटी पर कसना चाहते हैं। तब मन में प्रश्न आता है, क्या प्राचीन काल में चीजों…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : “अनर्थका: हि मंत्रा:” यानि मंत्र अनर्थक हैं, ये किसने कहा और क्यों?‘मायावी अम्बा और शैतान’ : खून से लथपथ ठोस बर्फीले गोले में तब्दील हो गई वह
जोतसोमा के घने जंगलों की अंतहीन टेढी-मेढ़ी राहों पर एक अजनबी आकृति उदास सी भटक रही थी। मानो वह जादू-टोने और भटकती आत्माओं की मायावी…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : खून से लथपथ ठोस बर्फीले गोले में तब्दील हो गई वहहोली जैसे त्यौहारों की धरोहर उसके मौलिक रूप में अगली पीढ़ी को सौंपें तो बेहतर!
पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक होते हैं। ये समाज की विविध मान्यताओं वा परम्पराओं को अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। इसी क्रम में हम बचपन से होली…
View More होली जैसे त्यौहारों की धरोहर उसके मौलिक रूप में अगली पीढ़ी को सौंपें तो बेहतर!जल संकट का हल छठवीं कक्षा की किताब में, कम से कम उसे ही पढ़ लें!
‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह कुछ और सोच पाता कि उसका भेजा उड़ गया
“अब तो ये दो हो गई हैं। सुना है कि वह बागी लड़की भी यहीं कहीं हैं।” “हमें उन दोनों को पकड़ना ही होगा। भले…
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