महाराष्ट्र की भूमि देवी-देवताओं की भूमि है। अपने हाथों में नानाविध शस्त्रास्त्र धारण कर आसुरी शक्तियों का विध्वंस करने वाले देवी-देवता मराठों के घरों में,…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : आक्रान्ताओं से पहले….. दुग्धधवल चाँदनी में नहाती थी महाराष्ट्र की राज्यश्री!Tag: सरोकार
शिवाजी ‘महाराज’ : किहाँ किहाँ का प्रथम मधुर स्वर….
बात अप्रैल-2005 की है। जीवन में पहली बार ‘जाणता राजा’ महानाटक के माध्यम से छत्रपति शिवाजी के जीवन-चरित्र को सामने से देखने का मौक़ा मिला…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : किहाँ किहाँ का प्रथम मधुर स्वर….महिला-पुरुष खिलाड़ियों की नीलामी क्या ग़ुलामों की ख़रीद-फ़रोख़्त की याद नहीं दिलाती?
इतिहास भूलने की चीज़ नहीं है। याद रखने और सबक लेने की चीज़ है। इसके बावजूद न जाने क्यों, लोग भूल जाया करते हैं। सबक…
View More महिला-पुरुष खिलाड़ियों की नीलामी क्या ग़ुलामों की ख़रीद-फ़रोख़्त की याद नहीं दिलाती?सरकार रोकने का बन्दोबस्त कर रही है, मगर पढ़ने को विदेश जाने वाले बच्चे रुकेंगे क्या?
साल 2022 में हिन्दुस्तान से क़रीब 6.5 लाख बच्चे पढ़ने के लिए विदेश चले गए। यह संख्या बहुत जल्द 10 लाख या उससे भी ज़्यादा…
View More सरकार रोकने का बन्दोबस्त कर रही है, मगर पढ़ने को विदेश जाने वाले बच्चे रुकेंगे क्या?‘थ्री इडियट’ के फुंगशुक वाँगड़ू यानी सोनम वाँगचुक भूख-हड़ताल कर रहे हैं, ताकि ‘विकास-लीला’ से लद्दाख बच जाए
‘थ्री इडियट’ फिल्म के फुंगशुक वाँगड़ू तो सबको याद होंगे ही। अस्ल ज़िन्दगी में इस फिल्मी किरदार का नाम है, सोनम वाँगचुक। लद्दाख में रहते…
View More ‘थ्री इडियट’ के फुंगशुक वाँगड़ू यानी सोनम वाँगचुक भूख-हड़ताल कर रहे हैं, ताकि ‘विकास-लीला’ से लद्दाख बच जाएजानकारों ने बताया- प्रबन्धन के क्षेत्र में योग कितना प्रासंगिक है
मानव जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान योग से सम्भव है। आज के शोध कहते हैं कि योग हमें और हमारे जीवन को ही केवल…
View More जानकारों ने बताया- प्रबन्धन के क्षेत्र में योग कितना प्रासंगिक हैमृच्छकटिकम्-अंतिम भाग : दासता ऐसी बुरी होती है कि सत्य कहने पर भी कोई भरोसा नहीं करता
चारुदत्त चांडालों द्वारा वध हेतु ले जाया जाता है। वह अपनी मृत्यु की सम्भावना से दुखी नहीं है। अपितु कलंकित होकर मृत्यु का ग्रास बन…
View More मृच्छकटिकम्-अंतिम भाग : दासता ऐसी बुरी होती है कि सत्य कहने पर भी कोई भरोसा नहीं करतामृच्छकटिकम्-19 : सुखी व्यक्ति के शत्रु भी मित्र हो जाते हैं, वहीं दु:ख में मित्र भी शत्रु
चांडालों के साथ चलते हुए सैनिक चारुदत्त को बाँधकर श्मशान की तरफ ले जाते हैं। मार्ग में चांडाल चारुदत्त से जानना चाहते हैं कि उसे…
View More मृच्छकटिकम्-19 : सुखी व्यक्ति के शत्रु भी मित्र हो जाते हैं, वहीं दु:ख में मित्र भी शत्रुमृच्छकटिकम्-18 : सत्य कहिए, सत्य बोलने से सुख प्राप्त होता है
चारुदत्त न्यायाधीश से विदूषक को अपने निर्दोष होने की गवाही के लिए बुलाने का अनुरोध करता है। इसके बाद विदूषक के आने की प्रतीक्षा करते…
View More मृच्छकटिकम्-18 : सत्य कहिए, सत्य बोलने से सुख प्राप्त होता हैमृच्छकटिकम्-17 : विपत्ति के समय मनुष्य पर छोटे-छोटे दोष से भी बड़े अनिष्ट हो जाते हैं
वसंतसेना को मृत समझकर शकार उसे उद्यान में छोड़कर चला आता है। वह सोचता है कि वसंतसेना की हत्या के अपराध का दोष क्यों न…
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