छत्तीसगढ़ के तुलसी गाँव की एक तस्वीर। ऐसी तस्वीरें वहाँ आम हैं।
टीम डायरी
साल 1978 में एक फिल्म आई थी, ‘मैं तुलसी तेरे आँगन की’। उसमें इन्हीं शब्दों के साथ एक गीत था, “मैं तुलसी तेरे आँगन की। कोई नहीं मैं तेरे साजन की।” अलबत्ता, यहाँ हम जिस ‘बढ़िया छत्तीसगढ़िया’ कहानी का ज़िक्र कर रहे हैं, उसके लिए इन शब्दों में थोड़ा हेर-फेर कर सकते हैं, “मैं तुलसी यूट्यूब के आँगन की, सब कुछ हूँ मैं तेरे साजन की।” इतने हेर-फेर के साथ छत्तीसगढ़ के तुलसी गाँव की पूरी कहानी समझी जा सकती है।
हाँ, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे हुए एक गाँव का नाम है ‘तुलसी’। इस गाँव को ‘यूट्यूब की राजधानी’ कहा जाने लगा है। कारण कि 4-5 हजार की आबादी वाले इस गाँव में अधिकांश लोग यूट्यूब वीडियाे बनाकर कमाई कर रहे हैं। यहाँ तक कि कुछ लोगों ने तो यूट्यूब वीडियो बनाने के लिए अब अपनी नौकरी तक छोड़ दी है। इस गाँव में यूट्यूब वीडियो बनाने वाले हर उम्र के लोग हैं। बच्चे, युवा, महिला, पुरुष, बुज़ुर्ग, सभी आयु वर्ग के।
यही कोई एक सप्ताह पहले इस गाँव के बारे में बीबीसी वर्ल्ड ने ख़ास रपट प्रकाशित की है। उसमे बाद से यह गाँव देशभर की सुर्ख़ियों में आ गया है। बताते हैं कि तुलसी गाँव में यूट्यूब क्रान्ति-2018 में शुरू हुई। जय वर्मा और उनके मित्र ज्ञानेन्द्र शुक्ला ने ‘बीइंग छत्तीसगढ़िया’ नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया। आज उनके चैनल से 1,25,000 लोग जुड़ चुके हैं और लगभग 26 करोड़ दर्शक हैं। हर महीने की कमाई भी अच्छी-ख़ासी है।
इन दोनों को जब यूट्यूब चैनल से महीने में 30,000 रुपए मिल रहे थे, तब से ये लोग नौकरी छोड़कर पूरी तरह यही काम कर रहे हैं। आज उनकी देखा-देखी गाँव के क़रीब 1,000 लोग यूट्यूब पर वीडियो बना रहे हैं। प्रदेश सरकार भी उनकी मदद कर रही है। सरकार ने 2023 में इस गाँव के लोगों की मदद के लिए यहाँ एक अत्याधुनिक स्टूडियो भी बनवा दिया है, जहाँ वीडियो बनाने के लिए तमाम तरह की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं हैं।
तो हुई न वही बात, “सब कुछ हूँ मैं तेरे साजन की, मैं तुलसी यूट्यूब के आँगन की”। और फिर यह कहानी अपने आप में ‘रोचक-सोचक’ के साथ ‘प्रेरक’ भी तो है।
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