अपनी स्वदेशी साइकिल… नहीं, बैटरी वाली स्वदेशी साइकिल

टीम डायरी, 11/5/2022

दिल्ली की एक नई-नवेली कम्पनी है, ‘ध्रुव विद्युत’। इसके संस्थापक गुरुसौरभ ने एक बढ़िया नवाचार किया है। उन्होंने हवाई जहाजों को बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली धातु से एक उपकरण बनाया है। इसमें बैटरी फिट की हुई है। साथ ही साइकिल में बहुत मामूली से परिवर्तन किए हैं। इस सबकी मदद से साइकिल को कभी भी बैटरी से चलने वाले वाहन में तब्दील किया जा सकता है। उपकरण सामान्य साइकिल में पैडल के ऊपर वाले हिस्से में आसानी से फँसाया और निकाला जा सकता है। मतलब जब मर्जी हो लगा लें। जब पैडल मारकर साइकिल चलाने का मन करे तो हटा लें।

इस बैटरी वाले उपकरण की मदद से साइकिल 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। एक बार में चार्ज करने पर 40 किलोमीटर तक। करीब 170 किलो तक वजन ले जाया जा सकता है। आग, पानी, मिट्‌टी से भी उपकरण सुरक्षित है। महिन्द्रा एंड महिन्द्रा कम्पनी के मालिक आनन्द महिन्द्रा भी इस नवाचार की तारीफ कर चुके हैं। और समाज से जुड़े अपने सरोकारों के चलते , देर से सही, इसने #अपनीडिजिटलडायरी में भी जगह बनाई है।

महिन्द्रा ने इस प्रयोग की तारीफ करते हुए एक मार्के की बात कही थी। इसी साल फरवरी में। ये कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि यह उपकरण व्यावसायिक रूप से बहुत सफल होता है या नहीं। फर्क इससे अधिक पड़ता है कि हम भारत के लोग लगातार जलवायु परिवर्तन जैसी ज्वलन्त समस्याओं के समाधान की दिशा में कुछ न कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं। जिससे जो बन पड़ रहा है, योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं। आनन्द महिन्द्रा ने इसी आधार पर अपना कुछ धन गुरुसौरभ की कम्पनी में लगाने की घोषणा की थी। और हम अपने शब्द उन पर निवेश कर रहे हैं। 

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Neelesh Dwivedi

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