Categories: cover photoVideo

भारतीय रेल में स्वागत है : सुहागरात मनाइए, पूजा-पाठ करिए, चादर-तकिया चुरा ले जाइए!!

टीम डायरी

भारतीय रेल बदल रही है। काफी हद तक बदल चुकी है। बदलाव का पहला पहलू- रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अभी 12 जुलाई, रविवार को एक कार्यक्रम में बताया है कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 से चलने लग जाएगी। अलबत्ता, यह भी गौर करने लायक है कि गुजरात के सूरत से बिलिमोरा के बीच महज 70-75 किलोमीटर की रेल लाइन पर ही यह बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। पहला चरण है न, इसीलिए। मगर इतनी सी दूरी में बुलेट ट्रेन से क्या फायदा होगा, क्या नुकसान, यह सब विश्लेषण बाद में होता रहेगा। फिलहाल तो इतने से ही खुश हो लेते हैं कि देश की रेलगाड़ियाँ गोली (बुलेट) की रफ्तार से चलें, इसकी शुरुआत हो रही है।  

अब बदलाव का दूसरा पहलू। नीचे एक वीडियो दिया गया है। कोई साहब हैं (नाम अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है)। जाहिर है, पैसे वाले ही होंगे। उन्होंने भारतीय रेल खान-पान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के माध्यम से अभी आठ जुलाई को दिल्ली से मुम्बई के लिए पूरा एक विशेष डिब्बा (सैलून) आरक्षित कराया। इसके लिए 3,08,580 रुपए का अग्रिम भुगतान भी कर किया। यह डिब्बा आम तौर पर उच्च श्रेणी के विशिष्ट अतिथियों के लिए होता है। इसमें पूरा एक शयनकक्ष होता है। रसोई होती है। बैठक कक्ष होता है। भोजन करने का कमरा अलग होता है। हर कहीं बढ़िया शौचालय, आदि की सुविधाएँ होती हैं, वातानुकूलित। 

तो बुकिंग के बाद यह डिब्बा 10 जुलाई को पश्चिम एक्सप्रेस में लगाया गया। एक तरफ की यात्रा के लिए। और रास्ते में देखिए, इस डिब्बे का उपयोग क्या हो रहा है! इसके संभवत: बैठक कक्ष में कोई पूजा-पाठ चल रहा है। पंडित जी बैठे हैं। यजमान बैठे हैं। मंत्रोच्चार हो रहा है। क्या पता हवन, आदि भी हुआ हो। हालाँकि जो वीडियो सार्वजनिक हुआ, उसमें हवन होते हुए दिख नहीं रहा है। पर ठीक है, जो भी है। मतलब कहने का यह कि अगर जेब में पैसा है, तो भारतीय रेल अब ऐसी सुविधा देने को भी तैयार है शायद? 

सिर्फ इतना ही नहीं, नीचे दिया गया एक और वीडियो देखिए। इसमें तो नंदीग्राम एक्सप्रेस से सफर करने जा रहे एक नवविवाहित दंपति के लिए अलग से डिब्बा भी आरक्षित कराने की जरूरत नहीं समझी गई। बल्कि प्रथम श्रेणी के कूपे में ही उनकी सुहागरात का पूरा बंदोबस्त कर दिया गया है। बाकायदा सजावट की गई। अन्य जरूरी व्यवस्थाएँ की गईं, ताकि सफर पूरे आनंद के साथ कट सके। हालाँकि दक्षिण मध्य रेलवे ने यह वीडियो सामने आने के बाद संबंधित ट्रेन के टिकट संग्राहक को निलम्बित कर दिया है। पर यह सब हुआ कैसे और क्यों? इस बारे में अब तक कुछ भी पता नहीं चल सका है। ज्यादा पता करने की जरूरत भी क्या है? जेब भरी है तो रेलवे हर तरह की सुविधाएँ देने को तैयार है। लाभ उठाइए। ऐसे नहीं तो वैसे, चाहे जैसे। 

अब इन दो प्रसंगों से आनंद न आया हो, तो एक और है। सूचना के अधिकार कानून के तहत भारतीय रेल से जुड़ा एक और समाचार सामने आया है। इसमें पता चला है कि कोरोना महामारी गुजरने के बाद बीते चार सालों में वातानुकूलित डिब्बों में सफर करने वाले, अमूमन भरी हुई जेब वाले लोगों ने सरकारी सेवाओं का भरपूर उपयोग-दुरुपयोग किया है। कैसे? यूँ कि इन लोगों ने वातानुकूलित डिब्बों में आराम फरमाते हुए सफर तो किया ही, गंतव्य तक पहुँचने पर चादर, तकिए और तकिए के खोल भी अपने संग ले गए। सीधी भाषा में कहें तो चुराकर ले गए। जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच करीब इस तरह की 1.27 करोड़ चीजें चोरी हो गईं। इससे भारतीय रेल को करीब 104.51 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। 

इसमें भी दिलचस्प कि सबसे ज्यादा इस तरह की चोरी कहाँ हुई, जानते हैं? बीकानेर, राँची, दिल्ली, मुम्बई और जोधपुर के रेल मण्डलों में। अब इनमें राँची को अगर छोड़ भी दें किन्हीं कारणों से तो अन्य सभी बताई गई जगहों से और तक वातानुकूलित डिब्बों में सबसे ज्यादा आवाजाही कौन करता है। पैसे वाला वर्ग ही न? तो फिर सीधे तौर पर यह समझा जा सकता है क्या कि भारतीय रेल ने सम्भवत: पैसे वालों को ऐसी सुविधाएँ दे रखी हैं कि आइए, सफर कीजिए, सुहागरात मनाइए, पूजा-पाठ कीजिए, और तकिया, चादर, तकिया के खोल, आदि चुराकर घर ले जाइए? उत्तर भारतीय रेल का शीर्ष प्रबंधन ही दे सकेगा यकीनन। बशर्ते, वह देना चाहे।

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

दोस्ती-ईमानदारी हो तो ऐसी, 35 साल पुराना कर्ज 1,200 किलोमीटर जाकर 25 गुणा चुकाया!

जय जय श्री राधे  https://www.ndtv.com/india-news/35-years-after-borrowing-rs-1-000-in-saudi-arabia-kerala-man-returns-rs-25-000-to-ex-colleague-with-interest-11760293  https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2026/Jul/11/kerala-man-travels-1200-km-to-repay-31-year-old-debt-in-telangana Read More

1 day ago

‘सरल भक्तमाल’- 10..: अब हम सीधे कलियुग में हुए भगवान के भक्तों के चरित्र क्यों कहेंगे?

‘श्री भक्तमाल’ के करीब-करीब सभी संस्करणों में कथा का क्रम सत युग में हुए भगवान… Read More

2 days ago

जो अपना युद्ध नहीं रोक पा रहा, उसे भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का श्रेय, नोबेल चाहिए!

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने एक बार कहा था, “लोकतंत्र लोगों का, लोगों… Read More

4 days ago

सच्ची कहानी जो बताती है कि जीवन कठिन है और वास्तविकता का सामना करना कठिनतम!

सोशल मीडिया के मंच ‘लिंक्डइन’ पर एक उद्यमी किरण वर्मा ने मार्मिक कहानी साझा की… Read More

5 days ago

राम-धाम में लूट, जन्मभूमि-मन्दिर पर राजनीति, लेकिन लोग शान्त हैं, क्यों? सुनिए जवाब…!

अयोध्या के श्री रामजन्मभूमि मन्दिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की लूट हो गई।… Read More

7 days ago