घर में बच्चों को ‘लैंगिक समानता’ के बारे में भी बताएँ, ताकि वे आगे कोई भेद न करें

खुशी अरोड़ा, दिल्ली

वैसे तो हम सब इस विषय से भली-भाँति परिचित हैं, लेकिन मैं आपको फिर से याद दिला दूँ। ‘लैंगिक समानता’ का मतलब पुरुषों, महिलाओं सहित ट्रांसजेंडर्स को भी राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य आदि से जुड़े पहलुओं में समान अवसर प्रदान करने से होता है।  

हमारे अस्तित्त्व के लिए जिस तरह भोजन, पानी और आश्रय महत्त्वपूर्ण है, वैसे ही इस आधुनिक युग में हम अपने लिए लैंगिक समानता भी चाहते हैं। क्योंकि इस प्रकार की समानता हमें बेहतर जीवन और अवसर प्रदान करती है। हम जानते हैं कि लैंगिक असमानताएँ अब भी कई जगहों पर हैं, जो अच्छी नहीं हैं। कभी-कभी हमारे दैनिक जीवन में देखा जाता है कि लोग पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव करते हैं। वे मानते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक सक्षम हैं। इस प्रकार का भेदभाव रंग, जाति, सामाजिक स्थिति आदि पर भी आधारित होता है।

हालाँकि मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ कि इस प्रकार की असमानता किसी भी राष्ट्र की प्रगति को नुकसान पहुँचाती है। उसमें अवराधे डालती हैं। जबकि ‘लैंगिक समानता’ हमारी संस्कृति और सबसे महत्त्वपूर्ण कि हमारे राष्ट्र को एक साथ बाँधती है। यह हमारे देश को मजबूत बनाती है क्योंकि यह सभी पुरुषों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को बिना किसी भेद, भय या प्रतिबंध के, पूरे आत्मविश्वास के साथ, अपने सपनों को पूरा करने का अवसर देती है।

सदियों पहले सामाजिक परिस्थिति यह तय करती थी कि जब पुरुष रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर जाएँ तो महिलाओं को घर के अंदर रहकर सबकी देखभाल करनी है। यह प्रथा सदियों तक चलती रही। उस दौर में बाहरी दुनिया सुरक्षित नहीं थी। लेकिन आजकल समय बदल गया है। अब महिलाएँ बाहर आ-जा सकती हैं। शिक्षित हो सकती हैं। अपने जुनून को आगे बढ़ा सकती हैं और अपने अस्तित्त्व के लिए पैसे कमा सकती हैं।

लिहाजा, हम सब को अपनी पुरानी मानसिकता बदलकर ‘लैंगिक समानता’ की स्थिति को और बेहतर करना चाहिए हमें नैतिक मूल्यों के साथ-साथ अपने घर में बच्चों को ‘लैंगिक समानता’ के बारे में भी बताना चाहिए। कि यह क्या है? और यह महत्त्वपूर्ण क्यों है? ताकि वे भविष्य में कभी किसी के साथ भेदभाव न करें।

धन्यवाद मेरे विचारों को पढ़ने के लिए।

आपका दिन मंगलमय है।
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(खुशी दिल्ली के आरपीवीवी सूरजमल विहार स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं। उन्होंने ‘अपनीडायरीलिखिए’ सेक्शन में लिखकर यह पोस्ट #अपनीडिजिटलडायरी तक पहुँचाई है। वह डायरी की पाठकों में से एक हैं।)
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