‘बुगा स्फियर’! दूसरी दुनिया से आकर गिरा धातु का यंत्र, जो संस्कृत मंत्रों पर प्रतिक्रिया देता है!

नीलेश द्विवेदी, भोपाल, मध्य प्रदेश

यह इसी साल के मार्च महीने की बात है। दक्षिण अमेरिका के कोलम्बिया के आसमान पर कोई अनोखी, अनजानी सी चीज दिखाई दी थी। उड़न तश्तरी जैसी या शायद वही। ऐसी चीजों के बारे में कुछ स्पष्ट जानकारी नहीं है, इसलिए इन्हें ‘यूएफओ’ (अनआइडेन्टीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) कहा जाता है। तो उस दिन जो यूएफओ दिखा था, पर वह कहाँ से आया, कहाँ गया? किसी को नहीं पता। अलबत्ता, उस घटना के चन्द दिनों बाद ही कोलम्बिया से कुछ मील दूर उत्तरी अमेरिका के मैक्सिको में धातु का एक रहस्यमय गोल यंत्र मिला। 

उस यंत्र को ‘बुगा स्फियर’ नाम दिया गया है। माना जा रहा है कि कोलम्बिया में दिखे यूएफओ से ही यह यंत्र छिटककर गिरा है। या शायद गिराया गया है। यह यंत्र धातु की कई परतों से बना है। पूरा गोल है, मगर कमाल की बात है कि इसमें कहीं कोई जोड़ नहीं है। इसके ऊपरी हिस्से में कुछ विचित्र आकृतियाँ बनी हैं। जैसी अपने श्रीयंत्र आदि में होती हैं। कुछ संकेत, कुछ प्रतीक नजर आते हैं। इन्हें ‘ईश्वरीय’ कहा जा रहा है। ऐसा बताया जाता है कि गोले के भीतर और बाहर का  तापमान अलग-अलग है। भीतर बहुत ज्यादा गर्म है और बाहर से एकदम ठण्डा। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ऐसी धात्विक संरचना इंसानो की निर्माण क्षमता से बाहर की बात है। 

मतलब, इसे इंसानों नहीं बनाया है क्योंकि वह बना ही नहीं सकता। तो फिर किसने बनाया, कहाँ बना, धरती पर कैसे पहुँचा, किसी ने जानकर गिराया या गलती से छिटकर गिर गया? ऐसे तमाम सवाल अभी अनसुलझे हैं। इनके जवाब तलाशने की कोशिश की जा रही है। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए वैज्ञानिक संस्कृत मंत्रों की मदद ले रहे हैं। और इससे भी बड़ी दिलचस्प बात है कि यह ‘बुगा स्फियर’ संस्कृत के मंत्रों को प्रतिक्रिया भी दे रहा है। नीचे दिए गए वीडियो में यह प्रयोग स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 

वैज्ञानिकों ने ‘बुगा स्फियर’ के सामने ‘रेडियो फ्रिक्वेंसी’ पकड़ने वाले यंत्र रखे और उनकी एक सहयोगी ने संस्कृत मंत्रों का उच्चारण किया। इन मंत्रों के पढ़े जाते ही ‘बुगा स्फियर’ से मिले संकेतों से दोनों आरएफ मीटर बज उठे। साथ ही, ‘बुगा स्फियर’ में भी कम्पन दर्ज किया गया। यद्यपि, इस संवाद का मतलब क्या है? यह रहस्य अभी अनसुलझा है। मगर यह तय है कि वैज्ञानिक अगर आगे सफल हुए तो इस प्रयोग से ब्रह्माण्ड के कुछ अनोखे रहस्यों से पर्दा जरूर हट सकता है। ‘बुगा स्फियर’ से जुड़ा एक विस्तृत वीडियो भी नीचे है। देख सकते हैं। 

अलबत्ता, इस घटना और इस अध्ययन का एक और मतलब भी है। यह कि सनातन संस्कृति को हमेशा कमतर बताने वाले, उस पर अँगुलियाँ उठाने वाले अपने दिमागों के जाले साफ कर लें। क्योंकि यह सही है कि समय के साथ सनातन संस्कृति में तमाम विचलन हुआ है। इस्लामिक और पाश्चात्य प्रभाव के कारण सनातन परम्परा को कल्पित, काल्पनिक भी कहा जाने लगा है। लेकिन फिर भी उसे खारिज बिल्कुल नहीं किया जा सकता। आज की सच्चाई बस इतनी ही है कि लोगों को सनातन संस्कृति के गूढ़ रहस्य समझ में नहीं आ रहे हैं। इसीलिए और कुछ साम्प्रदायिक साजिशों के कारण भी, सनातन को कमतर बताने में लोग अपनी शान समझ रहे हैं। 

हालाँकि उम्मीद है कि ‘बुगा स्फियर’ जैसी घटनाओं और प्रयोगों के क्रम में जब भी कभी पश्चिम के वैज्ञानिक ही सनातन संस्कृति को श्रेष्ठ बता देंगे, तब लोगों के दिमाग के जाले साफ हो जाएँगे। 

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Neelesh Dwivedi

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