इस विज्ञापन से क्या हम कुछ सीख सकते हैं?

टीम डायरी, 24/10/2020

ये एक विज्ञापन है। लेकिन बेहद प्रासंगिक, संवेदनशील और सामाजिक सन्देश देने वाला। सामाजिक इसलिए क्योंकि मातृशक्ति रूप बेटियों की अहमियत हमेशा ही कम आँके जाने जैसे मसले को छूता है। संवेदनशील इसलिए क्योंकि यह सिर्फ़ स्त्री ही नहीं, समाज में बेहद उपेक्षित जीवन जीने वाले हिजड़ों की संवेदनाओं तक भी पहुँचता है। और प्रासंगिक इसलिए क्योंकि ये अंग्रेजी अवधारणा वाले मातृ दिवस (मदर्स डे) पर जारी हुआ था, जबकि इस वक्त पूरा देश भारतीय संस्कृति वाला नौ-दिनी मातृदिवस मना रहा है।

इसकी प्रासंगिकता उन सूचनाओं के मद्देनज़र बढ़ती है, जो लगातार आती हैं, आ रही हैं। कभी उत्तर प्रदेश में बच्चियों से दुष्कर्म की। कभी पंजाब, राजस्थान में वैसी घटनाओं के दोहराव कीं। कभी गुजरात से किसी दुधमुँही बच्ची को मरने के लिए फेंक दिए जाने की। इस विरोधाभास के बीच ये विज्ञापन हमें सोचने पर मज़बूर करता है। हमारे सामने सवाल छोड़ता है कि क्या हम इससे कुछ सीख सकते हैं? अगर सीख सकें तो निश्चित रूप से इस बार माँ भगवती की हमारी आराधना कुछ हद सफल समझी जा सकेगी।

—— 

(विशेष नोट : यह विज्ञापन ‘मदर्स डे 2019’ पर प्रेगान्यूज़ ने जारी किया था। यह उसकी ही बौद्धिक सम्पदा का हिस्सा है। #अपनीडिजिटलडायरी ने सिर्फ़ अपने सामाजिक सरोकारों की वज़ह से इसे लिया है। डायरी इसके बौद्धिक अधिकार पर दावा नहीं करती।)

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Apni Digital Diary

Share
Published by
Apni Digital Diary

Recent Posts

56 साल के ‘युवा’ सत्ता के लिए आग भड़का रहे और 28 साल के देश को नई ऊँचाई दे रहे!

अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More

2 hours ago

वंदेमातरम

जय जय श्री राधे Read More

1 day ago

‘सरल भक्तमाल’- 11..: तर्क कोई कितने भी दे, वैष्णव भक्ति के मूल सम्प्रदाय तो चार ही हैं!

कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More

3 days ago

फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?

शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More

4 days ago

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने अंग्रेजी को ‘विदेशी भाषा’ कह दिया, तो हाय-तौबा क्यों?

भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More

5 days ago

जिन्हें सच्ची खुशी की तलाश, वे आईआईटी प्रवेश परीक्षा में जानबूझकर फेल भी हो जाते हैं!

जिन्दगी अपनी है, चुनाव भी अपने ही होते हैं। ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन… Read More

6 days ago