जीवन में सफलता के दम्भ में चूर लोग अक्सर दावा किया करते हैं कि उन्होंने “जो भी मक़ाम हासिल किया अपने दम पर किया”, “ज़िन्दगी…
View More ध्यान से देखिए वीडियो, ऐसे ही न जाने कितने लोग पर्दे के पीछे से हमारी मदद कर जाते हैंCategory: चुनिन्दा पन्ने
हम कैसे इतने अधर्मी और असंवेदनशील बना दिए गए?
घर के सामने रहने वाली पांडे ताईजी ने रोज की तरह सुबह उठकर घर के कोने पर आकर एक डलिया रख दी। कुछ देर बाद…
View More हम कैसे इतने अधर्मी और असंवेदनशील बना दिए गए?मायावी अम्बा और शैतान : भाई को वह मौत से बचा लाई, पर निराशावादी जीवन से….
अंबा के दु:स्वप्नों का सिलसिला तभी से शुरू हो गया था, जब वह पैदल चल रही थी। उस वक्त उसने खुद को न जाने कैसे-कैसे…
View More मायावी अम्बा और शैतान : भाई को वह मौत से बचा लाई, पर निराशावादी जीवन से….साफ़-सफ़ाई सिर्फ सरकारों की ज़िम्मेदारी नहीं, देश के हर नागरिक की है
सफ़ाई हमारी ज़िन्दगी का वह अहम हिस्सा है, जो हमारे व्यक्तित्त्व की पहचान भी कराता है। एक सफ़ाई पसन्द व्यक्ति ही अस्ल में ज़िम्मेदार शख़्स…
View More साफ़-सफ़ाई सिर्फ सरकारों की ज़िम्मेदारी नहीं, देश के हर नागरिक की हैगुढी पाडवा : धर्ममय प्राणों के नवोन्मेष का काल
निसर्ग में अनुस्यूत परमतत्त्व जिस ऋतु-पर्यावरण, आचार-विचार, आहार-विहार चक्र से मानवता में प्रवाहित हाेता है उसके विज्ञान के ज्ञान को भी धर्म कहते हैं। हमारे…
View More गुढी पाडवा : धर्ममय प्राणों के नवोन्मेष का कालराग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिश
बहुत मधुर राग है। राग झिंझोटी। खमाज थाट के अन्तर्गत इसे वर्गीकृत किया गया है। रात के दूसरे पहर (नौ से 12 बजे के बीच)…
View More राग झिंझोटी : एक छोटी सी कोशिशअब आईआईटी वालों को भी नौकरी नहीं, अगर ये सच है तो चिन्ताजनक है!
देश में जारी चुनावी चकल्लस के बीच आई एक ख़बर ने समाज के बड़े वर्ग में चिन्ता पैदा कर दी है। हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार ने…
View More अब आईआईटी वालों को भी नौकरी नहीं, अगर ये सच है तो चिन्ताजनक है!‘मायावी अम्बा और शैतान’ : अनुपयोगी, असहाय, ऐसी जिंदगी भी किस काम की?
# भविष्यवाणियाँ # उस जादूगरनी से मिलना उसकी अटल नियति थी। एक भविष्यवाणी। भले उसके भीतर हम कहीं छिपे थे लेकिन उस जादूगरनी के सम्मोहन…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : अनुपयोगी, असहाय, ऐसी जिंदगी भी किस काम की?देखो प्रिय वसंत….
देखो प्रिय वसंत जरा बाहर आओ मधुमास की सुबह है कन्नौज के इत्रों से अधिक महक रहा जाने अनजाने फूलों का यह वितान वसंत के…
View More देखो प्रिय वसंत….‘संस्कृत की संस्कृति’ : “अनर्थका: हि मंत्रा:” यानि मंत्र अनर्थक हैं, ये किसने कहा और क्यों?
आज हम सभी चीजों, बातों और विचारों को वैज्ञानिक कसौटी पर कसना चाहते हैं। तब मन में प्रश्न आता है, क्या प्राचीन काल में चीजों…
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