सह्याद्रि के माथे और तलहटी में फैला मावल का आँचल उफनते नदी-नालों तथा तुकाराम महाराज की तेजस्वी अभंगवाणी से सिंचित था। गुलामी एवं गँवारपन के…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : “करे खाने को मोहताज… कहे तुका, भगवन्! अब तो नींद से जागो”Category: चुनिन्दा पन्ने
उड़ान भरने का वक्त आ गया है, अब हमें निकलना होगा समाज की हथकड़ियाँ तोड़कर
क्या इंसान का वजूद महज़ एक पुतले जितना है? जो दुनिया के बनाए कानून और रस्मों का आँखें बन्द कर पालन करे, बस? आखिर क्यों…
View More उड़ान भरने का वक्त आ गया है, अब हमें निकलना होगा समाज की हथकड़ियाँ तोड़करशिवाजी ‘महाराज’ : मन की सनक और सुल्तान ने जिजाऊ साहब का मायका उजाड़ डाला
लखुजी और शहाजी (श्वसुर-दामाद) में सदा के लिए मनमुटाव हो गया। वे एक-दूसरे के बैरी हो गए। लेकिन शहाजी राजे और जिजाऊ साहब में पहले…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : मन की सनक और सुल्तान ने जिजाऊ साहब का मायका उजाड़ डालादूसरे का साथ देने से ही कर्म हमारा साथ देंगे
बचपन से कोई भी अच्छा या बुरा काम करने पर हमने अपने बड़ों से अक्सर सुना है कि इंसान जैसा बोता है, वेसा ही काटता…
View More दूसरे का साथ देने से ही कर्म हमारा साथ देंगेशिवाजी ‘महाराज’ : मराठाओं को ख्याल भी नहीं था कि उनकी बगावत से सल्तनतें ढह जाएँगी
अमावस की काली रात गहरा रही थी। यातनाओं से छुटकारा दिलानेवाला भी तो कोई हो। किसको टेरें? सुनकर दौड़ आने वाले श्रीहरि भी तो अब…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : मराठाओं को ख्याल भी नहीं था कि उनकी बगावत से सल्तनतें ढह जाएँगी60 की उम्र में 100 साल जीने का लक्ष्य बनाया, 96 तक पहुँच भी गईं, मगर कैसे?
अमेरिका के न्यू यॉर्क की क्वीन्स काउन्टी (कस्बा) में पैदा हुईं एक तैराक हैं। उम्र 96 साल। नाम है, जूडी यंग। और वे इस उम्र…
View More 60 की उम्र में 100 साल जीने का लक्ष्य बनाया, 96 तक पहुँच भी गईं, मगर कैसे?अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : आज समय की जरूरत है कि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस। दुनिया को यह अनूठा दिन बांग्लादेश की देन है। जबकि भाषाई विविधता बांग्लादेश के बजाय भारत और अफ्रीकी देशों में कहीं ज्यादा…
View More अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : आज समय की जरूरत है कि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए…तो समझिए कि हम भी मर चुके हैं, हम सब माँस के पुतलेभर हैं!
मध्यप्रदेश के उज्जैन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक महिला पत्रकार की साड़ी खींच ली जाती है। नोचा जाता है। ‘मुख्यमंत्री साहब’ सॉरी कहकर आगे…
View More …तो समझिए कि हम भी मर चुके हैं, हम सब माँस के पुतलेभर हैं!पाँच लाइनों का ‘पंच’
एक विज़ुअल है, दृश्य। सुबह का समय है। एक बच्चा अपने पापा की उँगली पकड़े जा रहा है। सोसायटी से बाहर की ओर। पापा के…
View More पाँच लाइनों का ‘पंच’एक वक़्त में कई काम करना अच्छा ही होता है, ऐसा मानना सही नहीं
एक वक़्त में कई काम करना अच्छी बात है, ऐसा बहुत से लोग सोचते हैं। कई लोग तो करते भी हैं। कान में मोबाइल लगा…
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