जौहर ने महाराज को पूरे चार महीने पन्हाला में बन्द रखा था। लेकिन अब उनके अचानक भाग निकलने से उसके दुःख का पार नहीं रहा।…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : एक ‘इस्लामाबाद’ महाराष्ट्र में भी, जानते हैं कहाँ?Category: चुनिन्दा पन्ने
शिवाजी महाराज : अपने बलिदान से एक दर्रे को पावन कर गए बाजीप्रभु देशपांडे
कल-कल बहती आषाढ़ की धाराओं के साथ मावलों का खून बह रहा था। एक हो रहा था। उधर, बीच राह की कासारी नदी और नाले-पनाले…
View More शिवाजी महाराज : अपने बलिदान से एक दर्रे को पावन कर गए बाजीप्रभु देशपांडेशिवाजी महाराज :.. और सिद्दी जौहर का घेरा तोड़ शिवाजी विशालगढ़ की तरफ निकल भागे
जासूस छिपकली के पैरों से टोह ले रहे थे। झाड़-झंखाड़ और नालों-पनालों से भरे लम्बे-चौड़े विस्तार में एक जगह पर उनकी नजर रुक गई। वहाँ…
View More शिवाजी महाराज :.. और सिद्दी जौहर का घेरा तोड़ शिवाजी विशालगढ़ की तरफ निकल भागेसड़कों पर इतना शोर, इतनी बदहवासी? आखिर क्यों?
कभी सड़क के किनारे खड़े होकर दो मिनट के लिए अपने फोन की ऑडियो रिकार्डिंग ऑन कर दीजिए। फिर घर पहुँचकर, हाथ-मुँह धोकर, कुछ खा-पीकर…
View More सड़कों पर इतना शोर, इतनी बदहवासी? आखिर क्यों?शिवाजी महाराज : जब 60 साल की जिजाऊ साहब खुद मोर्चे पर निकलने काे तैयार हो गईं
“पन्हालगढ़ स्वराज्य में आ गया। पन्हाला जैसा प्रचंड और बलाढ्य गढ़ मिलने से स्वराज्य की ताकत बढ़ गई। पन्हाला से सटकर एक और छोटा सा…
View More शिवाजी महाराज : जब 60 साल की जिजाऊ साहब खुद मोर्चे पर निकलने काे तैयार हो गईंदेखो न, कैसे मैंने होली मनाई….
सुबह उठा तो सबसे पहले जिस चीज में दिमाग भिड़ाना पड़ा ,वह था आँखों में चुपरा गया काजल। रात में होली जलाकर आने के बाद…
View More देखो न, कैसे मैंने होली मनाई….धन्य है यह त्योहार, जिसमें सब रंग बदलते हैं… जय होली, जियो होली
लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन। रोज से लगभग दोगुनी भीड़। हर एक पैर जल्दी-जल्दी अपने गन्तव्य की ओर बढ़ रहा था। टिकट के लिए लगी…
View More धन्य है यह त्योहार, जिसमें सब रंग बदलते हैं… जय होली, जियो होलीशिवाजी महाराज : लड़ाइयाँ ऐसे ही निष्ठावान् सरदारों, सिपाहियों के बलबूते पर जीती जाती हैं
खान जब बीजापुर से चला था तो विदाई से पहले बादशाह अली आदिल शाह और बड़ी बेगम ने साफ शब्दों में कह दिया था, “उस…
View More शिवाजी महाराज : लड़ाइयाँ ऐसे ही निष्ठावान् सरदारों, सिपाहियों के बलबूते पर जीती जाती हैंशिवाजी महाराज : शिवाजी राजे ने जब अफजल खान के खून से होली खेली!
शिवाजी राजे ने अफजल खान से लोहा लेने की ठान ली। इसी अफजल खान ने बेड़ियाँ डालकर उनके पिता की बारात निकाली थी। इसी ने…
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कोंकण में शिवाजी राजे ने तहलका मचा दिया था। बीजापुर दरबार में लगातार वही खबरें आ रही थीं। शाही दौलत को जबर्दस्त खतरा पैदा हो…
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