नए साल की शुरुआत से ही बीते साल (2022) की एक रिपोर्ट कई जगहों पर सुर्ख़ियों में है। रिपोर्ट में ख़ुशियों के पैमाने पर दुनिया…
View More अपने खोल से बाहर निकलिए, पटियों पर पाँव धरिए, दोस्तों से गपियाइए, खुशी के कई पायदान ऊपर चढ़ जाएँगेCategory: चुनिन्दा पन्ने
अधूरी सीख : सदियों में कभी पहाड़ सुबकते हैं, तो संभलते नहीं….
खुद हुए आबाद और शोहरत के लिए हमने पहाड़ बर्बाद कर दिए, बहुत रश्क और भरोसा था नोटों के चंद टुकडों पर, हमने कच्ची जमीं…
View More अधूरी सीख : सदियों में कभी पहाड़ सुबकते हैं, तो संभलते नहीं….मृच्छकटिकम्-19 : सुखी व्यक्ति के शत्रु भी मित्र हो जाते हैं, वहीं दु:ख में मित्र भी शत्रु
चांडालों के साथ चलते हुए सैनिक चारुदत्त को बाँधकर श्मशान की तरफ ले जाते हैं। मार्ग में चांडाल चारुदत्त से जानना चाहते हैं कि उसे…
View More मृच्छकटिकम्-19 : सुखी व्यक्ति के शत्रु भी मित्र हो जाते हैं, वहीं दु:ख में मित्र भी शत्रुएकांत कीअकुलाहट : ऐसा न हो कहीं कि मेरी वजह से…
कल अचानक वह शख़्स चल बसा, जो हाड़तोड़ मजदूरी करता था। एक जगह सुबह खाते-बही लिखता। फिर दिन भर किसी बन्द पड़ी फेक्ट्री में किसी…
View More एकांत कीअकुलाहट : ऐसा न हो कहीं कि मेरी वजह से…मृच्छकटिकम्-18 : सत्य कहिए, सत्य बोलने से सुख प्राप्त होता है
चारुदत्त न्यायाधीश से विदूषक को अपने निर्दोष होने की गवाही के लिए बुलाने का अनुरोध करता है। इसके बाद विदूषक के आने की प्रतीक्षा करते…
View More मृच्छकटिकम्-18 : सत्य कहिए, सत्य बोलने से सुख प्राप्त होता हैदेखिए और गौर कीजिए, कैसे लोग आपकी ख़ामियाँ ढूँढ़ने में तेजी दिखाते हैं लेकिन…
बहुत छोटा सा वीडियो है। महज़ ढाई मिनट का। लेकिन इसमें सन्देश बहुत बड़ा है। ऐसा जो कोई साल-दो साल नहीं ज़िन्दगीभर टिके रहने, काम…
View More देखिए और गौर कीजिए, कैसे लोग आपकी ख़ामियाँ ढूँढ़ने में तेजी दिखाते हैं लेकिन…स्वास्थ्य सेवाओं के मामले हमारा देश सच में, अमेरिका से बेहतर ही है
इसी साल के मई महीने की बात है। मुझे मेरी बेटी की ग्रेजुएशन सेरेमनी के लिए न्यू यॉर्क जाना था। यात्रा से 24 घंटे पहले…
View More स्वास्थ्य सेवाओं के मामले हमारा देश सच में, अमेरिका से बेहतर ही हैमृच्छकटिकम्-17 : विपत्ति के समय मनुष्य पर छोटे-छोटे दोष से भी बड़े अनिष्ट हो जाते हैं
वसंतसेना को मृत समझकर शकार उसे उद्यान में छोड़कर चला आता है। वह सोचता है कि वसंतसेना की हत्या के अपराध का दोष क्यों न…
View More मृच्छकटिकम्-17 : विपत्ति के समय मनुष्य पर छोटे-छोटे दोष से भी बड़े अनिष्ट हो जाते हैंकृतज्ञता हमें वास्तव में मानवीय बना देती है
पिता जी के जब पैर छूता हूँ, तो वे कहते हैं ‘खुश रहो’। वैसे कभी नहीं पूछा कि ‘आप ‘खुश रहो’ क्यों कहते हो? ‘आयुष्मान…
View More कृतज्ञता हमें वास्तव में मानवीय बना देती हैमृच्छकटिकम्-16 : प्रेम में प्रतीक्षा दुष्कर है…
वसंतसेना बदली हुई गाड़ी से उद्यान की तरफ जा रही होती है। वसंतसेना की प्रतीक्षा में अधीर चारुदत्त बार-बार विदूषक से मार्ग देखने का अनुरोध…
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