अभी इसी महीने के शुरू में यह कार्टून सोशल मीडिया पर चला था। तब तक इसने शायद बहुत लोगों का ध्यान अपनी तरफ नहीं खींचा।…
View More सोचिए और बताइए, क्या ये हो रहा है या होने वाला है?Category: चहेते पन्ने
खुद को पहचानिए, ताकि आप खुद ही खुद से महरूम न रह जाएँ
हमारा जीवन दिन-ब-दिन और ज़्यादा तनवभरा होता जा रहा है। इसके पीछे बहुत से कारण हैं। जैसे हमारा भोजन, दिनचर्या और सबसे महत्त्वपूर्ण हमारा वातावरण।…
View More खुद को पहचानिए, ताकि आप खुद ही खुद से महरूम न रह जाएँशिवाजी महाराज : शिवाजी ने सिद्दी जौहर से ‘बिना शर्त शरणागति’ क्यों माँगी?
सिद्दी के घेरे में खड़ीं तोपें पन्हाला पर आग उगल रहीं थीं। लेकिन इससे पन्हाला को कोई क्षति नहीं पहुँची। सिद्दी ने पहचान लिया कि…
View More शिवाजी महाराज : शिवाजी ने सिद्दी जौहर से ‘बिना शर्त शरणागति’ क्यों माँगी?होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी…
आज रंग-पंचमी है। होली के उत्सव का चरम। इस मौके पर एक खूबसूरत कवित्त की कुछ लाइनें देखिए… होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी। …
View More होरी खेलै नन्द को लाल, मैं वारी-वारी…शिवाजी महाराज : खान का कटा हुआ सिर देखकर आऊसाहब का कलेजा ठंडा हुआ
अफजल खान का सिर महाराज ने राजगढ़ को रवाना किया। फतह की खबरें आऊसाहब के पास पहुँच गई। खबरें खुशियों के रंग बिखेरतीं आऊसाहब के…
View More शिवाजी महाराज : खान का कटा हुआ सिर देखकर आऊसाहब का कलेजा ठंडा हुआअनाज की बरबादी : मैं अपने सवाल का जवाब तलाशते-तलाशते रुआसी हो उठती हूँ
जब मैं देखती हूँ लोगों को कचरे में रोज़ खाना फेंकते हुए, तो सोच में पड़ जाती हूँ। क्या भोजन की कीमत सिर्फ कुछ रुपए…
View More अनाज की बरबादी : मैं अपने सवाल का जवाब तलाशते-तलाशते रुआसी हो उठती हूँ“फूलै फूलै चुन लिए, काल्ह हमारी बार…” सतीश कौशिक जी… सादर नमन्
‘वो सात दिन’ में अपना काम करके अनन्त यात्रा पर निकल ही गया बन्दा आख़िर। एक दिन हमें भी यह सब छोड़कर जाना ही है।…
View More “फूलै फूलै चुन लिए, काल्ह हमारी बार…” सतीश कौशिक जी… सादर नमन्रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे….
‘अपनी डिजिटल डायरी’ की ओर से सभी पाठकों, दर्शकों, श्रोताओं को होली की अनन्त शुभकामनाएँ। इन शुभकामनाओं को और रंगीन किया है, भोपाल की वैष्णवी…
View More रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे….शिवाजी ‘महाराज’ : राजे को तलवार बहुत पसन्द आई, आगे इसी को उन्होंने नाम दिया ‘भवानी’
शिवाजी राजे का ध्यान अब कोंकण किनारे पर लगा हुआ था। उन्हें साफ नजर आ रहा था कि पश्चिम का यह सिन्धु सागर स्वराज्य-सत्ता के…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : राजे को तलवार बहुत पसन्द आई, आगे इसी को उन्होंने नाम दिया ‘भवानी’अवध में होरी : माता सीता के लिए मना करना सम्भव न था, वे तथास्तु बोलीं और मूर्छित हो गईं
अवध में उत्सव की तैयारी हो रही थी। होली को अब बस केवल तीन दिन ही शेष बचे थे। राजा दशरथ जी के महल में…
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