एक ख़ूबसूरत कविता। एक उतनी ही सुकून भरी आवाज़। इन दो कलाकारों में लिखने वाले एक हैं, आशीष मोहन ठाकुर। ये मध्य प्रदेश पुलिस में…
View More परोपकार : फिर भी छपी नहीं किसी अख़बार में अब तक ये ख़बरें…!Category: चहेते पन्ने
मृच्छकटिकम्-6 : जो मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार बोझ उठाता है, वह कहीं नहीं गिरता
‘माथुर’ और ‘संवाहक’ के मध्य जुए में हारे सोने के सिक्कों के लिए लड़ाई होती है। ‘माथुर’ अपने सिक्के पाने के लिए बेचने के उद्देश्य…
View More मृच्छकटिकम्-6 : जो मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार बोझ उठाता है, वह कहीं नहीं गिरतामृच्छकटिकम्-4 : धरोहर व्यक्ति के हाथों में रखी जाती है न कि घर में
‘चारुदत्त’ को ‘मैत्रेय’ बताता है, “शकार बलात् वसंतसेना का पीछा करते हुए यहाँ आया था। और वह न्यायालय में वाद दायर करने की बात कहते…
View More मृच्छकटिकम्-4 : धरोहर व्यक्ति के हाथों में रखी जाती है न कि घर मेंमृच्छकटिकम्-2 : व्यक्ति के गुण अनुराग के कारण होते हैं, बलात् आप किसी का प्रेम नहीं पा सकते
‘मैत्रेय’ का प्रश्न ‘चारुदत्त’ के सामने यथावत् है, ‘मरण और निर्धनता में तुम्हें क्या अच्छा लगेगा?’ गहरी श्वांस लेकर ‘चारुदत्त’ उत्तर देता है, “निर्धनता और…
View More मृच्छकटिकम्-2 : व्यक्ति के गुण अनुराग के कारण होते हैं, बलात् आप किसी का प्रेम नहीं पा सकतेख़ुदकुशी के ज्यादातर मामलों में लोग मरना नहीं चाहते… वे बस चाहते हैं कि उनका दर्द मर जाए
अभी 10 सितम्बर को ‘वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे’ था। यानी ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’। ऐसे मौकों पर अक्सर चर्चा आत्महत्या के बारे में ही होती…
View More ख़ुदकुशी के ज्यादातर मामलों में लोग मरना नहीं चाहते… वे बस चाहते हैं कि उनका दर्द मर जाएमृच्छकटिकम्-1 : बताओ मित्र, मरण और निर्धनता में तुम्हें क्या अच्छा लगेगा?
‘शिव, कल्याण करने वाले शिव। शिव, पूर्ण शिव। समाधिस्त शिव, जो समस्त चेतना के कारक हैं, जो समस्त विश्व का केन्द्र हैं, जो परमब्रह्म हैं,…
View More मृच्छकटिकम्-1 : बताओ मित्र, मरण और निर्धनता में तुम्हें क्या अच्छा लगेगा?ऋषि पंचमी और #अपनीडिजिटलडायरी का दूसरा वर्ष : लम्बा है सफ़र इसमें कहीं…
दूसरा वर्ष। #अपनीडिजिटलडायरी की दूसरी वर्षगाँठ। साल 2020 में हिन्दी महीने की यही तिथि थी, ऋषि पंचमी की, जब #अपनीडिजिटलडायरी को एक व्यवस्थित रूप दिया…
View More ऋषि पंचमी और #अपनीडिजिटलडायरी का दूसरा वर्ष : लम्बा है सफ़र इसमें कहीं…डायरी पर नई श्रृंखला- ‘मृच्छकटिकम्’… हर मंगलवार
कहते हैं किसी को किसी से उपदेश सुनना अच्छा नहीं लगता। लेकिन पत्नी या प्रेमिका उपदेश दे तो वह भी मनोहर लगता है। और काव्य…
View More डायरी पर नई श्रृंखला- ‘मृच्छकटिकम्’… हर मंगलवारमाँगिए तो कृष्ण को ही माँग लीजिए, सब कुछ जीत लेंगे
बड़ा सरल है ‘चोर’ कहना। कहें भी क्यों न, आखिर ‘चोर’ कहने से कुछ-कुछ अपना सा लगता है। किसी को अपने जैसा पाते हैं तो…
View More माँगिए तो कृष्ण को ही माँग लीजिए, सब कुछ जीत लेंगेजन्माष्टमी, रक्षाबन्धन जैसे त्योहारों में अक्सर मुहूर्त-भेद क्यों होता है?
अभी पाँच दिन पहले रक्षाबन्धन निकला है। इसमें दुविधा की स्थिति बनी कि वह 11 अगस्त को है या 12 को। इसी तरह आने वाली…
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